शुक्रवार, 20 नवंबर 2009

क्या आप उपलब्ध हैं या नहीं चैट के लिए

कई तरह के चुनने के माध्यम दिया गए हैं जीमेल या अन्य माध्यमों में . जिसमे एक माध्यम  है कि मैं व्यस्त हूँ  लाल बटन के द्वारा , याने यहाँ हूँ भी और उपलब्ध नहीं हूँ ? एक और माध्यम भी उपलब्ध है अदृश्य  का जिससे आप अपना काम करते रह सकते हैं और लोग आपसे संपर्क चैट  के द्वारा नहीं कर सकते .मुझे तो अदृश्य का माध्यम सही लगता है अगर आप उपलब्ध नहीं हैं बात करने के लिए . आपका क्या विचार है .

11 टिप्‍पणियां:

SACCHAI ने कहा…

" bahut hi accha lagta hai ..acchi post "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

Udan Tashtari ने कहा…

सभी अदृष्य होकर बैठ जायेंगे तो हमारा क्या होगा? :)

बी एस पाबला ने कहा…

invisible तो एक तरह का वन-वे ट्रैफिक है

बी एस पाबला

शरद कोकास ने कहा…

जिसमे आप व्यवधान नही चाहते ऐसा काम करते वक्त अदृश्य रहना ही ठीक है ।

राज भाटिय़ा ने कहा…

है तो हेरा फ़ेरी, लेकिन गलत नही, क्योकि मै हमेशा यही करता हुं

Science Bloggers Association ने कहा…

मैं भी अदृश्य का प्रयोग करता हूँ, वर्ना लोग खामखां परेशान करने चले आते हैं।
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सिर पर मंडराता अंतरिक्ष युद्ध का खतरा।
परी कथाओं जैसा है इंटरनेट का यह सफर।

ज्ञानदत्त G.D. Pandey ने कहा…

सम्प्रेषण के लिये उपलब्ध, चैट के लिये नहीं।

cmpershad ने कहा…

ईश्वर अदृश्य है और सब देखता है.... आप सम्पर्क नहीं कर सकते.... तो फिर, क्या ब्लागर ईश्वर के फ़ालोअर नहीं बन सकते:)

BrijmohanShrivastava ने कहा…

सम्माननीय डाक्टर साह्ब । पहली बार आपके ब्लोग पर आया हूं। आज के लेख का तो अर्थ नही समझ पाया किन्तु आपका पुराना लेख जो मित्र व भाई साहब से संबन्धित था उसे पढा । आप तो चिकित्सक है ,लेकिन शायद आपने भी महसूस किया होगा कि अनहोनी हो जाती है ,""जीव करम बस दुख सुख भागी/कभी ऐसा भी होता है कि
अपनें चलत न आजु लगि ,अनभल काहुक कीन्ह
केहि अघ एकहि बार मोहि,देअं दुसह दुखु दीन्ह

Krishna Kumar Mishra ने कहा…

उम्दा सोच किन्तु छुपना...........क्या ठीक आदत है

Nirmla Kapila ने कहा…

हम तो आज कल इसी का उपयोग कर रहे हैं धन्यवाद्