रविवार, 17 मई 2009

हम ब्लॉग क्यों लिखते हैं

कुछ बातें हम अपने सुख के लिए करते हैं स्वान्तः सुखाय। कुछ हम दूसरों के लिए करते हैं परिजन हिताय । ब्लॉग लिखने में भी एक भावना निहित रहती है , जिनमे उपरोक्त दोनों या एक भाव सम्मिलित हो सकता है । इसमे कुछ भाव मित्रता के भी जुड़ जाते हैं , अनजाने दूरस्थ लोगों से परिचय और संवाद । कई लोगों के लिए ये अपनी प्रतिभा को उकेरने का मंच है तो कुछ के ज्ञानवर्धन और श्रोता बनने का मंच । एक कथन है कि अपनी भावनाओं को दबाकर नही रखना चाहिए अन्यथा वह एक विषाद के रूप में भौतिक और मानसिक शरीर को प्रभावित करती है। इसमे लेकिन एक स्वनियंत्रण भी आवश्यक है , अपनी प्रस्तुति ऐसी रहे जिससे कि किसीकी भावना पीड़ित न हो , विचार और शब्द संयत भाषा में हो । ये प्रश्न कई बार उठता है कि गूगल को ब्लॉग पर नियंत्रण रखना चाहिए , क्या ये सम्भव है ? एक साधन आपको उपलब्ध किया गया है , कुछ स्वनिय्न्त्रनो के साथ अब ये आप पर निर्भर है कि आप इसका उपयोग कै़से करते हैं । वैसे गूगल ने ये व्यवस्था भी रखी है कि अगर कोई ब्लॉग आपको अनुचित लगे तो उसकी सूचना आप उन्हें दे सकते हैं । इसमे एक विरोधाभास हो सकता है कई बातें जो हमारी सभ्यता में आपतिजनक हो , उन्हें ऐसा न लगे ।

7 टिप्‍पणियां:

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र ने कहा…

आपके विचारो से सहमत हूँ कि ब्लॉग स्वांत सुखाय के लिए लिखे जाते है पर यदि इनसे(परिजन हिताय) किसी अन्य को फायदा पहुंचता है तो यह बहुत ही अच्छी बात है. आभार.

प्रेमलता पांडे ने कहा…

स्वांत-सुखाय, परिजन-हिताय होता है और परिजन-हिताय स्वांत- सुखाय होता है। अकेला अधूरा होगा।

RAJNISH PARIHAR ने कहा…

जी हाँ विचारों को.. प्रकट करने और उनके आदान प्रदान करने का अच्छा मंच है ये..!मैं तो इसे बहुत अच्छी शुरुआत मानता हूँ..!इन पर नियंत्रण तो स्वत ही होना चाहिए..

Nirmla Kapila ने कहा…

blog par likh kar aisa lagta hai ki koi to hai jo aapki bat sun raha hai mai to ise vardaan manti hoon doosra sab se bada karan hai ki jo sahityik rachnayen likhte hain un ke liye pustaken chhapvanaa bahut hi kathhin aur mehnga ho gaya hai ye madhyam unke likhne ki bhookh ko bhi shant karta hai hame dunia ko janne samjhne ka apne sampark badhaane ka achha avsar mil jata hai mere jaise retired aur bekar baithe logon ko apna samay bitane ka ek achha sadhan bhi mil jata hai

Anil Pusadkar ने कहा…

सहमत हूं आपसे,शत-प्रतिशत्।

vandana ने कहा…

aaj kafi log blog likh rahe hain aur sabke apne apne karaan honge.blog apni abhivyakti ka ek achcha sadhan ban gaya hai.isse yadi kisi ko sukh milta hai to bahut achcha hai magar iske sath jaroori hai ki hum iski garima ko banaye rakhein aur aisa kcuh na likhein jisse kisi ko dukh pahunche.

संगीता पुरी ने कहा…

सिर्फ ब्‍लाग के मामले में ही नहीं .. हर मामले में अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता मिली है .. तो उसका सदुपयोग करना चाहिए .. दुरूपयोग करने पर अपना नुकसान है।