शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

क्या है आपका पितृपक्ष

आज  मीनू खरे जी के ब्लॉग  पर नजर पड़ी.

सारे धर्म अपने बुजुर्गों का सम्मान करना सिखाते हैं . एक बात जो यहाँ सामने आ रही है उसपर मैं अपने विचार रखना चाहता हूँ .
हिन्दू धर्मं में मान्यता  है पुनर्जन्म की और यह अन्य धर्मों में भी है, कुछ दूसरी तरह से . इस्लाम में कहा जाता है कि एक दिन सब फिर उठ खड़े होंगे इसलिए शरीर को दफनाया जाता है . बौद्ध धर्मं ( Life after death) ने जितना काम किया है मृत्यु और उसके बाद पर  शायद ही किसी और धर्म ने किया है या जाहिर किया है . इसी सन्दर्भ में कहा जाता है कि जिस वंश कि मुक्ति होनी है उस वंश में लड़के का जन्म नहीं होगा . इसका कारण यह बताया  गया है कि पुत्र को परिवार का वाहक माना गया है . भ्रम यह है की जहाँ पुत्र नहीं होगा वहां वंश ख़त्म हो जायेगा जबकि  स्तिथि विपरीत है . यह एक मुक्ति का द्वार है . अब यह आप पर है आप कौनसा  मार्ग  अपनाना  चाहते हैं

14 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

अच्छा लगा आपके विचार जानकर इस विषय पर.

हेमन्त कुमार ने कहा…

ऐसा मार्ग जो हमें भ्रान्तियों से खींचकर शाश्वत मूल्यों की ओर प्रेरित करे वही बेहतर है ।

संजय तिवारी ’संजू’ ने कहा…

लेखनी प्रभावित करती है.

Vivek Rastogi ने कहा…

यह तो सब अपनी अपनी सुविधा के अनुरुप सोच सकते हैं।

Ashish Khandelwal ने कहा…

मुद्दा वाकई विचारणीय है.. हैपी ब्लॉगिंग

Anil Pusadkar ने कहा…

होई है वही जो राम रची राखा।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ACHHA LIKHA HAI AAPNE .... PUTRI YA PUTR ... JI RISHTON KI KADAR KARE JEETE JI KADAR KARE VO HI SABSE ACHAA HAI ... KOI FARK NAHI HAI AAJ PUTR YA PUTRI MEIN

शरद कोकास ने कहा…

बौद्ध धर्म सर्वाधिक वैज्ञानिक दृष्टि वाला धर्म है वहाँ पुनर्जन्म की व्याख्या भी इस तरह नही है जैसी की अन्य धर्मो मे है । लेकिन विडम्बना यह है कि अब उसमे भी कर्मकांडों का समावेश हो गया है ।

मीनू खरे ने कहा…

आज अचानक आपके ब्लॉग पर यह पोस्ट देखी.मुक्ति की अवधारणा बहुत अच्छी लगी डॉ. साहब. कोटिश: धन्यवाद.

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...
मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग "मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी "में पिरो दिया है।
आप का स्वागत है...

शरद कोकास ने कहा…

वैज्ञानिक द्रष्टि से सोचे सारे मार्गों से बेहतर है

varsha ने कहा…

I do believe in a soul so maybe once it leaves the body, it might enter another one.. But at least this concept is good for those criminals who have no fear of law & order..at least they'll be afraid of punishment in next birth if they escape it in this birth!

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

अच्छा लगा पढकर.

anjana ने कहा…

डॉ साहब जीवन मे कुछ मिलने की आशा है इसलिए हम जीना चाहते है।यदि हम यह जान जाये कि जीवन मे खोने के अलावा कुछ नही है तो जीने की आकांक्षा से मुक्ति मिल जायेगी हमे।