शुक्रवार, 29 अक्तूबर 2010

इस देश की कानून व्यवस्था(सरकार) क्या संगठित अपराधियों को महिमामंडित करके इस देश के सविधान की बलि चढ़ा रही है ?

केन्द्रीय सरकार ने देशद्रोहियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का  विचार त्याग दिया है !! क्योंकि इससे माहौल खराब होने का अंदेशा है कश्मीर में ? आज जो हालत हैं उससे ज्यादा क्या हालत खराब होंगे वहाँ ।

जब भी किसी संगठित अपराधी गिरोह चाहे वो कश्मीरी अलगाववादी हों या नक्सलवादी , सरकार उनसे सम्झौता करती है तो क्या संदेश जाता है आम जनता में । कि अपराध करना हो तो बड़ा करो , छूट भी जाओगे और सम्मान भी मिलेगा । एक छोटा गरीब चोर जेल में दाल दिया जाता है । छोटा अपराधी और आम जनता पुलिस से घबराती है लेकिन अगर आपने अपना गिरोह बना लिया तो सरकार आपको माला पहनाती है ।
सविधान निर्माता डॉ अंबेडकर ने कहा था अगर यह सविधान फेल हो गया तो इसे जला देना चाहिए क्या वह समय आ गया है ।

पता नहीं कब इस देश को लोग जगेंगे इस देश में छुपे गद्दारों को पहचानेगे । एक नहीं अनेक अरुंधति हैं यहाँ ।

8 टिप्‍पणियां:

अशोक बजाज ने कहा…

NICE....

ajit gupta ने कहा…

आजकल या तो अपराधी ही राजनीतिज्ञ बनते हैं या फिर बनने के बाद हो जाते हैं। इसलिए अरूंधति और गिलानी जैसे लोग उन्‍हें कसूरवार नहीं दिखते। त्‍यागी पुरूष अभी शेष हैं ना भारत में, उन्‍हें फंसाकर बताया जा रहा है कि देखो ये है अपराधी। पता नहीं यह सिलसिला कब रूकेगा?

राज भाटिय़ा ने कहा…

देशद्रोहियों,अपराधी गिरोह सब के सब इन नेताओ की छत्र छाया मे पल रहे हे, आप किसे पकडने की बात कर रहे हे?कितने नेता खूद इस श्रेणी मे आते हे

cmpershad ने कहा…

` इससे माहौल खराब होने का अंदेशा है ...'

इसी डर से अब तक अफ़ज़ल गुरु को सज़ा नहीं दी गई। एक कायर देश[नेता पढें] से और क्या आशा रखी जा सकती है?

cmpershad ने कहा…

` इससे माहौल खराब होने का अंदेशा है ...'
इस कायर देश से और क्या उम्मीद की जा सकती है जो अफ़ज़ल गुरू को भी इसी डर से सज़ा देने में हिचकिचाता है।[ यह टिप्पणी दुबारा प्रेषित कर रहा हूं, शायद पहले वाली नहीं लग पाई]

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

सचमुच हालत चिंतनीय हैं।

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सुनामी: प्रलय का दूसरा नाम।
चमत्‍कार दिखाऍं, एक लाख का इनाम पाऍं।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

इसे समझदारी कहते हैं!

Meenu Khare ने कहा…

अच्छी एनालिसिस.