पाकिस्तान ने फिर एक इतिहास कायम कर दिया । मानवाधिकार के हनन की इससे बड़ी घटना शायद ही कोई हो ।
पाकिस्तान में गंभीर बाढ़ आई और उसने एक बड़े इलाके को तहस नहस करके रख दिया । इसके चलते इस वर्ष वहाँ स्वतन्त्रता दिवस के कार्यक्रम भी स्थगित कर दिये गए । भारत ने एक पड़ोसी और सवेदनशील जागरूकता का परिचय देते हुए हर संभव सहायता और 50 milion $ की तुरंत मदद की पेशकश की । पाकिस्तान ने यह पेशकश ठुकरा दी !! यूएनओ और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं सारे विश्व से मदद की गुहार कर रही हैं ।
एक राष्ट्र जो एक प्राकृतिक त्रासदी में भी अपने नागरिकों का भला नजरंदाज करता है उसके बारे में क्या कहा जाए ?
जागो कश्मीरियों जागो
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गुरुवार, 19 अगस्त 2010
मंगलवार, 2 फ़रवरी 2010
अमन की आशा , जी नहीं यहाँ न मैं ब्लॉग जगत की बात कर रहा हूँ , न महाराष्ट्र की
कुछ दिनो से टीवी में एक विज्ञापन आ रहा है , कुछ अलग सा. "अमन की आशा"
दरअसल यह एक प्रयास है , "टाइम्स ऑफ इंडिया" और पाकिस्तान के"जंग" समूह का दो देशों के बीच मैत्री एवं सदभावना का . अच्छा प्रयास है की दो पड़ोसी अच्छे रिश्ते बना सकें . इस प्रयास का महत्व इस लिए भी बढ़ जाता है कि यह कोई राजनैतिक प्रयास नहीं है . दोनों देशों के प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूहों का है .
जितना खून इन देशों में बहा है आजादी के बाद , विभिन्न कारणों से शायद ही इतना रक्त पात कभी इस धरा पर हुआ हो . अंग्रेजों ने अपनी राजनीति खेली और सफल रहे वही खेल हमारे कुछ लोगों ने सीख लिया और आजाद होते हुए भी पड़ोसी देश नफरत और हिंसा का जहर पीते रहे .इन का प्रयास कितना सफल होगा यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन आम आदमी तंग आ चुका है इस हिंसा से .
कुछ लोग इन प्रयासों से सहमत नहीं भी होंगे क्योंकि उनकी दुकान बंद हो जाएगी . लेकिन इनकी दुकानदारी
से ज्यादा जरूरी है अमन और चैन
दरअसल यह एक प्रयास है , "टाइम्स ऑफ इंडिया" और पाकिस्तान के"जंग" समूह का दो देशों के बीच मैत्री एवं सदभावना का . अच्छा प्रयास है की दो पड़ोसी अच्छे रिश्ते बना सकें . इस प्रयास का महत्व इस लिए भी बढ़ जाता है कि यह कोई राजनैतिक प्रयास नहीं है . दोनों देशों के प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूहों का है .
जितना खून इन देशों में बहा है आजादी के बाद , विभिन्न कारणों से शायद ही इतना रक्त पात कभी इस धरा पर हुआ हो . अंग्रेजों ने अपनी राजनीति खेली और सफल रहे वही खेल हमारे कुछ लोगों ने सीख लिया और आजाद होते हुए भी पड़ोसी देश नफरत और हिंसा का जहर पीते रहे .इन का प्रयास कितना सफल होगा यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन आम आदमी तंग आ चुका है इस हिंसा से .
कुछ लोग इन प्रयासों से सहमत नहीं भी होंगे क्योंकि उनकी दुकान बंद हो जाएगी . लेकिन इनकी दुकानदारी
से ज्यादा जरूरी है अमन और चैन
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