गुरुवार, 10 जून 2010

क्या होगा अगर मैं इस देश के सविधान को मानने से इंकार कर दूँ

मैंने जन्म लिया इस धरती पर . जिसे लोगों ने बाँट रखा था . क्या मेरा कोई अधिकार है प्रजातन्त्र में ?

लोग कहेंगे क्या फालतू की बात है . अब इसपर कोई कानूनदा ही बता सकता है की कानूनी क्या व्यवस्था है.

किसी भी मनुष्य को इस देश में संवैधानिक अधिकार 18 वर्ष की उम्र में प्राप्त होते हैं . इसके पहले उसके क्या अधिकार हैं और कौन उसका और उसके कर्मों का  जिम्मेदार है ?

जब उसे यह अधिकार मिलता है तो उसे कोई इसकी जानकारी सरकार द्वारा उपलब्ध करायी जाती है . उसे कोई ज्ञान दिया जाता है की क्या हैं उसके अधिकार और क्या है उसकी जिम्मेदारियाँ . उसे कोई मौका दिया जाता है इसे स्वीकार या अस्वीकार करने का या केवल इस भूखंड में जन्म लेने के कारण वह एक बंधक है इस भूभाग के साम्राज्यकारियों का . कहाँ है freedom of choice. बहुत बहस होती है इस देश में चुनाव , सरकार और व्यवस्था के बारे में . इन सबके बीच आम आदमी का व्यक्तिगत अधिकार बली चढ़ जाता है .यही है सबसे बड़ा कारण भ्रष्टाचार का .एक संगठित सरकारी व्यवस्था जहाँ एक भुलावा दिया जा रहा है जनता को कि यहाँ प्रजातन्त्र है लेकिन वास्तव में प्रजा तंत्र में है .
इतने सदियों की गुलामी भी शायद genes में परिवर्तन ला देती है .

इस देश को गरीबी के चंगुल से छुडाने वालों का कहीं जिक्र ही नहीं सारी वाहवाही सरकार ने लूट ली . क्या किया सरकार ने ? काम किया इस देश के युवाओं ने रात रात जग कर BPO और कम्प्युटर में काम करके मलाई नेता खा रहे हैं .

एक तो संविधान बना राजशाही के आधार पर और उसे भी कमजोर पाकर आधुनिक राजा उसमें भी अपनी सुविधा जोड़ते गए .


बड़ी छोटी सी दुनिया है हिन्दी ब्लाग जगत की . इससे उम्मीद की जाए क्या इंकलाब की .

25 टिप्‍पणियां:

दिलीप ने कहा…

sahi keh rahe hain...blog chaahe ham hindi me kare par apne bachche ko chahte hain wo english school me hi padhe aur aaj ke haalaat ise majboori bhi bana rahe hain...inqlaab na aane waala ab....

shashikantsuman ने कहा…

क्या किया सरकार ने ?
जवाब है सरकार ने यह तय किया की शोषण की व्यवस्था अनवरत चलती रहे। पूँजीपतियो को लगतार श्रमिको की सप्लाइ होती रहे। इसकेलिये जरूरी था ,किसानो की अर्थव्यवस्था तबाह करना ताकि लोग शहरो की ओर भागे। आज २००० रुपयो मे १२ घन्टे काम करने वाले कहा से आ रहे है? यह भी तो हमारी सरकार की कारीस्तानी है। और अधिक क्या कहना आप लोग स्यंम ज्ञानी है।

shashikantsuman ने कहा…

क्या किया सरकार ने ?
जवाब है सरकार ने यह तय किया की शोषण की व्यवस्था अनवरत चलती रहे। पूँजीपतियो को लगतार श्रमिको की सप्लाइ होती रहे। इसकेलिये जरूरी था ,किसानो की अर्थव्यवस्था तबाह करना ताकि लोग शहरो की ओर भागे। आज २००० रुपयो मे १२ घन्टे काम करने वाले कहा से आ रहे है? यह भी तो हमारी सरकार की कारीस्तानी है। और अधिक क्या कहना आप लोग स्यंम ज्ञानी है।

Udan Tashtari ने कहा…

कलम आवाज उठाये, दूर तक जायेगी. इन्कलाब आयेगा.

आचार्य जी ने कहा…

आईये सुनें ... अमृत वाणी ।

आचार्य जी

रंजन ने कहा…

उनको क्या फर्क पडने वाला है...

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

क्या होगा अगर मैं इस देश के सविधान को मानने से इंकार कर दूँ ?
जबाब : लोग आपको अमीर और कोई बड़ा नेता समझने लगेगे !

vinay ने कहा…

सहमत हूँ आपसे ।

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

कोई फ़्रक नही पडेगा .

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

कोई फ़्रक नही पडेगा .

kunwarji's ने कहा…

क्यों खामख्वाह ही नजरो में आ रहे साहब....संविधान को ज्यों का त्यों को हर कोई कहा मान रहा है...

कुंवर जी,

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) ने कहा…

काम किया इस देश के युवाओं ने रात रात जग कर BPO और कम्प्युटर में काम करके मलाई नेता खा रहे हैं।

एकदम सही बात!!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़े शोध का विषय नहीं है । चलिये उनसे पूछते हैं जो संविधान की अवहेलना कर के भी सम्मान का जीवन जी रहे हैं । यदि उनका कुछ नहीं हुआ तो आपका क्यों कुछ होना चाहिये ?

zeal ने कहा…

Mahesh ji,

Indifference and insensitivity in govt and people is disappointing. I do not see any hope.

All i can say is, be prepared for the worst.

Divya

zeal ने कहा…

Mahesh ji,

Indifference and insensitivity in govt and people is disappointing. I do not see any hope.

All i can say is, be prepared for the worst.

Divya

निशांत मिश्र - Nishant Mishra ने कहा…

जो हुआ बुरा हुआ, जो होगा और भी बुरा होगा.
यह प्रकृति का चक्र है (भारतीयों के लिए).
क्यों व्यर्थ चिंता करते हैं? किससे डरते हैं?
जिस तरह एक मरता है, वैसे ही तो लाखों मरते हैं?

Sanjeet Tripathi ने कहा…

bhaiya aisa hai ki na to aap koi Top ho arundhaty roy ki tarah ki aapke aisa kahne ke baad ko bawal mach jaaye....

nahi aap kisi rajnitik dal se jude hain ki aapke aisa kahne ke baad media aapke pichhe lag pade bavjud iske ki aap ek media pariwar se jude hue hain....

baki aap to mujhse jyada jante hain na....

pratibha ने कहा…

महेशजी आपने बहुत सही कहा है, मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूं।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

बहुत गम्भीर प्रश्न किया है आपने, संविधान विशेषज्ञ ही इसका जवाब दे सकते हैं।
--------
भविष्य बताने वाली घोड़ी।
खेतों में लहराएँगी ब्लॉग की फसलें।

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

गम्भीर प्रश्न है ? ...फादर्स डे की शुभकामनाये ...

सर्प संसार ने कहा…

बहुत गम्भीर प्रश्न है, अपने वश का नहीं।
---------
क्या आप बता सकते हैं कि इंसान और साँप में कौन ज़्यादा ज़हरीला होता है?
अगर हाँ, तो फिर चले आइए रहस्य और रोमाँच से भरी एक नवीन दुनिया में आपका स्वागत है।

Rajey Sha ने कहा…

हम अपने से ही जो बन पड़े सम्‍पन्‍न कर लें काफी है। बाहरी कायदे कानून तो बनते बदलते रहते हैं, नहीं ?
http://rajey.blogspot.com/

Rajey Sha ने कहा…

हम अपने से ही जो बन पड़े सम्‍पन्‍न कर लें काफी है। बाहरी कायदे कानून तो बनते बदलते रहते हैं, नहीं ?
http://rajey.blogspot.com/

बेचैन आत्मा ने कहा…

संविधान तो मानना ही पड़ेगा. हाँ, यदि हम चाहते हैं कि देश कि दशा-दिशा सुधरे तो अच्छे लोगों को संसद में भेजना होगा जो संविधान की कमियों में संशोधन कर सकें..

बेचैन आत्मा ने कहा…

संविधान तो मानना ही पड़ेगा. हाँ, यदि हम चाहते हैं कि देश कि दशा-दिशा सुधरे तो अच्छे लोगों को संसद में भेजना होगा जो संविधान की कमियों में संशोधन कर सकें..