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बुधवार, 22 अप्रैल 2009

जयललिता ने साहसिक कदम उठाया

जयललिता ने DMK द्वारा राजनैतिक रूप से प्रायोजित बंद का विरोध करके साह्स का परिचय दिया है । काफी समय से तमिलनाडु के नेता वहां की जनता को भाषा और क्षेत्रीयता का जहर पिलाते रहे हैं । शायद पहली बार किसीने इसका विरोध किया है । अब जब श्रीलंका अपनी एक समस्या के समाधान के मुहाने पर पहुँच गया है तो लोग अपनी रोटी सेकने लगे हैं । इन लोगों ने तमिल लोगों का कितना नुकसान किया है, ये गरीब किससे कहेंगे ?
टीवी में कुछ बच निकल आए लोगों के चित्र देखे , ये चित्र अपने आप में उनकी अवस्था का चित्रण कर रहे हैं ।
और अब अमेरिका और मानवतावादी संगठन भी कूद पड़े हैं सलाह देने , कहां सो रहे थे ये इतने सालों तक । अन्तिम वक्त में तो यूरोपिय संगठन भी पीछे हट गया .

मंगलवार, 21 अप्रैल 2009

श्रीलंका आतंकवाद और हम

श्रीलंका की सेना बधाई की पात्र है की उसने बहुत सारे बंधकों को छुडा लिया और अपनी अन्तिम विजय की और अग्रसर है । हर देश को ये अधिकार है की वो अपनी संप्रभुता की रक्षा कर सके और शान्ति और व्यवस्था बनाये रख सके। सरकार का धर्म ही है की वो अपने नागरिकों की रक्षा कर सके ।
हमारे देश की सरकार कब जागेगी ? कब जब ये तथाकथित नक्सलवादी संसद की देहलीज तक पहुँच जायेंगे । कुछ दिन पहले थलसेना अध्यक्ष अपनी यात्रा बिना पूरी किए छत्तीसगढ़ से चले गए । एक अखबार में एक टी वी चैनल के संदर्भ से उनका बयान आया है कि नक्सलवाद सामाजिक आर्थिक समस्या है उसके लिए सेना की आवश्यकता नही है ! न जाने किसने जनरल की ब्रीफिंग की है ? चुनाव के पहले चरण में ही १७ सुरक्षा कर्मी शहीद हो गए हैं । छत्तीसगढ़ में नियुक्त BSF के अधिकारी का कुछ दिनों पहले ही बयान आया था कि ये समस्या पुलिस के बस की नहीं है । क्योंकि इससे लड़ने के लिए न उनके पास ट्रेनिंग है न ही हथियार । देश की सुरक्षा की चिंता करने वाले नेता कब जागेंगे और ये पता लगायेंगे कि इन्हे रसद पानी कहां से मिल रहा है जिससे इनके पास रॉकेट और ग्रेनेड लौंचेर जैसे हथियार पहुँच गए जो टीवी पर तालिबानी लिए घूमते हैं ?