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बुधवार, 15 अप्रैल 2009

मेरी गुजरात यात्रा

कुछ समय के लिए मैं ब्लॉग की दुनिया से दूर था । मैं गुजरात राज्य की यात्रा पर था जो सामाजिक और धार्मिक दोनों थी । गुजरात आज जो भी मैंने देखा और सुना पर्याय बन गया है नरेन्द्र मोदी का , जिससे भी मैंने बात की वही मोदी fan दिखा । गुजरात राज्य का बड़ा हिस्सा पेयजल की समस्या से ग्रस्त है , उसके बावजूद जो विकास इस राज्य ने किया है काबिले तारीफ़ है , वहाँ आज सिर्फ़ एक नाम चलता है - नरेन्द्र मोदी , कोई पार्टी नही । काफ़ी समय के बाद इस देश में किसी व्यक्ति ने ये स्थान पाया है। जन मानस का प्रतिनिधि ।
लोगों ने मुझे काफ़ी हिदायतें दी कि बड़े मंदिरों में सावधान रहना पंडे जाल में फंसा कर लूट लेंगे । लेकिन जितना बतया गया उससे काफ़ी कम निकला । ज्यादातर पंडे शायाद समझ गए हैं कि प्रेम से ज्यादा प्राप्त किया जा सकता है बजाय दबाव के ।
गुजरात राज्य आजादी के बाद से ही एकमात्र राज्य है जहाँ शराबबंदी है । इसका मतलब ये नही है कि मिलती नही है । अगर आप थोडी रसूख रखते हैं तो उपलब्ध है , किंतु लेनी आपको छुप कर ही होगी , आप उधम मचाने कि तो सोच भी नही सकते । अगर आप कानून से डरने वाले हैं तो कोई बात नही हर छेत्र से लगा हुआ कोई पड़ोसी है जो जी ही पर्यटक से रहा है खासकर दियू , दमन, दादरा और नगर हवेली । इससे ये तो लगा कि यह प्रदेश महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित है , इसमे लेकिन गुजरात की महिलायों का भी योगदान है वे आम भारतीय नारी की तरह भीरु नही हैं , कंधे से कन्धा मिलाकर काम करती हैं .