शुक्रवार, 31 जुलाई 2009

योग्यता जाये भाड़ में , हर चीज नीलाम कर दो शायद इससे बेईमानी कम हो

आये दिन हर क्षेत्र में बढ़ते भर्ष्टाचार को देखते हुए तो लगता है इसका राष्ट्रीयकरण कर देना चाहिए . जैसे रेलवे ने दलालों की देखा देखि तत्काल कर लगा दिया अच्छा किया कुछ पैसा तो सरकार के पास आया . अगर जेब से पैसा निकलना ही है तो सरकार की जेब में क्यों न जाये .
भ्रष्टाचार और महंगाई का मूल कारण है एक अनार सौ बीमार . जब वस्तुएं और अवसर कम होंगे या बेबुनियाद के कानून और ढीली कानून व्यवस्था होगी तो ये फै़लेगा ही .
क्या इसका कोई इलाज नहीं है . कल ही एक चैनल में चर्चा हो रही थी कि संसद और सांसद जनता के अमूल्य धन का दुरुपोग कर रहे हैं समाचारों में प्रकाशित मामलों को जैसे एक सीरियल की चर्चा में देश और जनता का अमूल्य धन व्यर्थ कर रहे हैं इसी कार्यक्रम में बताया गया कि सरकारी रिपोर्ट में बताया गया कि सरकार के द्वारा खर्च किया गया १ रूपये में ३० पैसा ही उचित स्थान तक पहुँच रहा है . भाई अगर ऐसा है तो भ्रस्ताचार में भरी कमी आई है क्योंकि राजीव गाँधी के ज़माने में तो केवल १० पैसा पहुच रहा था .
हर तरह के उपाय किये जा रहे हैं लोगों को पैसा बैंक खाते के द्वारा दिया जाया इत्यादि इत्यादि लेकिन दी़मक और चूहे कही न कही से चारा चर ही जाते हैं . आज ही एक फैसला और आया है प्रसिद्ध चारा घोटाले के बारे में, एक भूतपूर्व सांसद और अन्य १३ को सजा दी गयी है . झारखण्ड में ५३ मामले इस बारे में ७ स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चल रहे हैं जिनमे से ३० मामलों में २३० लोगों को सजा हो चुकी है जिनमे लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्र भी शामिल हैं. आज ही खबर आई कि कांग्रेस ने अपने कोटे से लालू यादव को संसद में प्रथम पंक्ति में स्थान उपलब्ध कराया है ! कल ही राहुल गाँधी का बयां आया था युवक कांग्रेसिओं के लिए कि वे अपने वाहनों में और नंबर प्लेट में अपने पदों का प्रदर्शन न करें . आज जन प्रतिनिधि इतने पंगु हो गए हैं कि उन्हें फोकट की सुरक्षा के बिना घर से निकलने में भी डर लग रहा है क्या इसीलिए आजादी पाई थी कि कुछ विदेशी शासकों को हटाकर देसी बैठा दिए जाएँ . इसके लिए भी वे संसद में वक़्त बर्बाद कर रहे हैं .

तो हम समस्या का निदान ढूंढते ढूंढते कहाँ आ गये ! अनावश्यक और पैसा वसूली वाले कानूनों को खत्म करना, कानून व्यवस्था का भारतीयकरण करना . सरकारी नियंत्रण को कम से कम करना . लोगों का रुझान सरकारी नौकरी पाने से दूर करना . उनमे आत्मस्वाभिमान जगाना . अगर ये सब नहीं हो सकता तो हर चीज चाहे वो नौकरी हो कोई अन्य अवसर जैसे मेडिकल कॉलेज की सीट को खुली नीलामी से बेच देना .

गुरुवार, 30 जुलाई 2009

जूठा खाने से भी ऐड्स की सम्भावना

प्रारंभिक जांच में ये पता चला है कि ऐड्स प्रभावित व्यक्ति के जूठे खाने से भी ऐड्स फ़ैल सकता है . ऐसा तब शक हुआ जब कुछ बच्चो में अमेरिका में ऐड्स के लक्षण पाए गए . जांच से पता चला कि इन बच्चो की माताओं को ऐड्स था और उन्होंने अपना जूठा खाना इन बच्चों को खिलाया था . अह सम्भावना व्यक्त की जा रही है कि माँ की लार से ये संक्रमण बच्चों तक आया होगा . एक चीज जो ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम है कि गहरे चुम्बन से भी ऐसा हो सकता है .

अगर ऐसा ही होना है तो हो चुका आम आदमी के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था का विकास

इस देश में हर कोई रोना रोता है बिगड़ी हुई स्वास्थ्य व्यवस्था का लेकिन इसका कोई स्थानीय समाधान ढूँढने के बजाय हमारे भाग्य विधाता विदेशों की ओर टकटकी लगाकर देखते रहते हैं. पहले दुर्भाग्य तो यह की इतना बड़ा बौधिक धन होने के बावजूद उसे अवसर नहीं मिलना . ओढी हुई नीतियां जो अंग्रेजों ने बनाई थी हमारे माडर्न अंग्रेज उसमे कोइसुधार या व्यवस्था नहीं कर पाए . हर नेता यही कहता है डॉक्टर गाँव नहीं जाना चाहते , प्रश्न यह है कि आपके पास कितने डॉक्टर हैं और इतने सालों में आपने कितने लोगों को यह ज्ञान पाने की सुविधा प्रदान की . ये खुद तो ५ साल में एक बार गाँव जाते हैं और सरकारी फरमान सुना देते हैं कि डॉक्टर को गाँव जाना चाहिए. सुनने में बड़ा अच्छा लगता है कि नेताजी बड़ी काम की बात कर रहे हैं लेकिन जिस गाँव में स्कूल भी नहीं है वहाँ जाकर डॉक्टर करेगा भी क्या ?
इस देश के लायक कोई सफल स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं बन पाने का कारण लोगों की अदूरदर्शिता ही कही जायेगी . इस देश को आवश्कता है मूलभूत डॉक्टर की नाकि उच्चतम शिक्षा की बाढ़ लगाने की . उच्च शिक्षा की भी जरूरत है लेकिन आज अडोस पड़ोस का मित्र पारिवारिक चिकत्सक गायब हो गया और उसकी जगह ले ली झोला छाप लोगों ने . पहले केवल पीएचडी और एलॉपथी चिकित्सक को ही डॉक्टर के नाम से जाना जाता था . आज तो बाढ़ सी आ गयी है ये जानना मुस्किल है कि अगला कौन सी पद्धति का चिकित्सक है या है भी नहीं ..
अपने पडोसी चीन और बंगला देश से भी आप सीख सकते थे जो कम खर्च में एक बुनियादी पद्धति का विकास करने में सफल हुए . लेकिन आपके चारो तरफ तो बड़ी बड़ी वैश्विक कंपनियां घूम रही थी .
आज अमेरिका जैसे देश को जो विश्व में आधुनिक चिकित्सा में सबसे आगे माना जाता है अपने पूरे सिस्टम को बदलने का प्रयास करना पड़ रहा है . विरोध वहां भी हो रहा है क्योंकि बड़ी बड़ी शक्तियां पीछे हैं. वहां सरकार अपने बजट का ३० प्रतिशत खर्च करने के बाद भी करोडो को स्वास्थ्य सुविधा नहीं दिला पा रही है ? यहाँ हम ३ प्रतिशत भी नहीं खर्च करके आसमान छू लेना चाहते हैं .
जिस तरह हम सारी नक़ल पश्चिम की कर रहे थे तो एक नक़ल और कर डाली पहले तो अपना बाजार उपभोक्ता वस्तुओं के लिए खोल दिया और साथ ही ले आये उपभोक्ता कानून . आप कह सकते हैं ये तो होना ही चाहिए . लेकिन इसका सबसे बुरा प्रभाव जो पश्चिम पहले से ही झेल रहा था अब ये गरीब देश झेल रहा है . इस कानून के भय से पहले तो चिकित्सक एक भयपूर्ण तनाव के माहोल में काम कर रहा है दुसरे सभी वस्तुएं महंगी और जनसाधारण की पहुँच से बाहर हो गयी हैं . आज किसी भी व्यक्ति की चकित्सा का ४० से ८० प्रतिशत खर्च दवाओं और अन्य सम्बंधित सामानों में होता है . जिनकी गुणवत्ता देखने का कोई अच्छा सिस्टम नहीं है , इसलिए धाद्ल्ले से नकली दवाओं और सामानों का बाजार गर्म है . MRP लगाकर लोगों को लूटने की खुली छूट कंपनियों को दे दी गयी है . कंपनियां भी आपसी प्रतिस्पर्धा में
डॉक्टरों को हर तरह से लुभा रही हैं .
कानून भी कभी मरहम लगा रहा है तो कभी चमड़ी नोच ले रहा है . सुप्रीम कोर्ट ने एक तरफ तो कई निर्णय दिए हैं जिनसे कि डॉक्टर अपना काम बिना किसी झूठे भय के दबाव में आकर कर सके, दूसरी ओर उसने एक सरकारी अस्पताल पर १ करोड़ रुपये का जुरमाना लगाया है एक ऑपरेशन के बाद हुए कॉम्प्लिकेशन के कारण . अगर किसीने कोई गलती जाबूझकर की है तो उसे उसकी सजा मिलनी चाहिए . प्रश्न केवल यह है इस देश और व्यस्था को देखते हुए इस सजा का कोई पैमाना तो होना चाहिए . किसीकी भी जान अमूल्य होती है उसका पैसे से मोल नहीं लगाया जा सकता लेकिन अगर इतने बड़ी सजा दी जाने लगी तो इस देश में स्वास्थ्य व्यवस्था का भगवन जाने क्या होगा.
.
कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट के मामले में जहाँ एक नामी वकील का अपराध सिद्ध हो गया है कि उसने गवाह को झूठी गवाही देने के लिए प्रेरित किया (जिसमे अभुक्त ने कार चढा कर कई लोगों की जान ले ली ), सजा २००० रुपये जुरमाना और ४ महीने काम से बाहर ?

मंगलवार, 28 जुलाई 2009

शाहरुख़ खान खुले आम प्रतिबंधित शिक्षा संस्थान का प्रचार कर रहे हैं

आजकल शायद आपने शाहरुख़ खान को एक शिक्षा संस्थान का प्रचार करते टीवी पर देखा होगा . क्या शाहरुख़ खान को इस बात की जानकारी है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कुछ समय पहले एक विज्ञापन निकाला था जिसमे कई संस्थानों के नाम थे जो मान्यता प्राप्त नहीं हैं और बड़े बड़े विज्ञापनों के प्रचार से जनता को धोखा दे रहे हैं . इस संस्था का नाम भी इस लिस्ट में था . इसके कर्ता धर्ता अपने को बड़ा मैनेजमेंट गुरु बताते हैं .

सोमवार, 27 जुलाई 2009

माओवादियों / नक्सलवादियों का युद्ध का ऐलान

शायद इसी का इन्तेजार बाकी था

CPI-Maoist to step up war to capture power in India

Sujeet KumarMon, Jul 27 02:43 PM

Raipur, July 27 (IANS) Indian Maoists, described by Prime Minister

Manmohan Singh

as the country's greatest security challenge, have come up with an

audacious plan

to seize political power by stepping up 'armed resistance' and inflicting

'severe losses to the enemy forces' all over the country.


At the same time, the outlawed Communist Party of India-Maoist

(CPI-Maoist)

is telling its guerrillas to learn a lesson from the decimation of the

Tamil Tigers in Sri Lanka and not to be overconfident.

The CPI-Maoist programme is part of a 20-page secret policy

document that was decided by the party's leadership at an undisclosed

forested area

last month. Dated June 12, IANS has a copy of the document.


The CPI-Maoist has warned that its new war against the Indian state will be

'more long drawn and more bitter' than the struggle India waged against

British colonial rule for

'seizure of political power'.


The document, 'Post-Election Situation, Our Tasks', is in English. It outlines

how and where

the Maoists need to step up attacks with a changed strategy, keeping in

mind the setbacks

suffered by the Liberation Tigers of Tamil Eelam (LTTE).


Under the sub-heading 'Immediate Tasks', it says the entire party and its

armed wings

need to carry out 'tactical counter-offensives and various forms of armed

resistance

and inflict severe losses to the enemy forces'.

'Attacks should be organised with meticulous planning against the state's

khaki

and olive-clad terrorist forces, SPOs (Special Police Officers), police informants,

and other

counter-revolutionaries and enemies of the people.


'These attacks should be carried out in close coordination with, and in

support of, the armed

resistance of the masses; these should be linked to the seizure of political

power and

establishment of base areas; it is the combined attacks by all the three

wings ... and the people

at large that can ensure the defeat of the enemy offensive.


'In order to defeat the new offensive by the enemy and to protect the gains

of People's War,

it is very essential to rouse the masses throughout the country (to) stand up

in support

of the struggles in Dandakaranya, Bihar, Jharkhand, Orissa, Andhra Pradesh,

West Bengal, Maharashtra, Karnataka and other places'.


Dandakaranya mostly covers Chhattisgarh's mineral rich Bastar region as well

as India's

most thickly forested Abujhmar hills where police believe the CPI-Maoist has a

military

headquarters and hideouts for its leaders.


The document makes several references to the LTTE, which the Sri Lankan

military

crushed in May, ending one of the world's longest running insurgencies.


It says that 'the setback suffered by the LTTE has a negative effect on the

revolutionary

movement in India as well as South Asia and the world at large'.

'The experience of LTTE's setback in Sri Lanka is very important to study and

take lessons.

The mistake of the LTTE lay in its lack of study of the changes in enemy tactics

and capabilities and an

underestimation of the enemy along with an overestimation of its own forces and

capabilities.'


The CPI-Maoist asks its guerrillas to 'create more difficulties to the enemy forces

by expanding

our guerilla war to new areas and intensifying the mass resistance in the existing

areas so as to

disperse the enemy forces over a sufficiently wider area'.


At the same time, the party has said there was a need to 'protect the leadership

and preserve

party cadres and fighters by avoiding unnecessary losses'.


It wants 'weaknesses in the existing mechanism' rectified 'by avoiding everything

likely to be

exposed to the enemy through betrayers, arrested persons and party records'.


The CPI-Maoist has gone on the offensive in recent months, slaughtering police

and paramilitary

forces in Chhattisgarh and other states.


The Maoist movement in India began in 1967 in West Bengal's Naxalbari village

because

of which the rebels came to be known as Naxalites. Though hundreds of Maoists

have

been killed since then, they continue to operate in several states.


शुक्रवार, 24 जुलाई 2009

मुर्गा रोटी खाओ सावन के गुण गाओ

शाकाहारी लोगों से क्षमा प्रार्थना के साथ . आजकल सावन का महिना चल रहा है , हर ओर बात चल रही है बढती हुई दाल और अनाज की कीमतों की सब्जियां और फल भी आसमान छू रहे हैं . बहुत से भक्तजन सावन मॉस में मांस भक्षण बंद कर देते है इसका प्रभाव इस व्यवसाय पर भी इतना हुआ कि आज दाल और मुर्गा समान कीमत पर मिल रहा है ८० रुपये किलो . अब ये निर्णय आप को करना है कि आप क्या पसंद करेंगे

गुरुवार, 23 जुलाई 2009

क्या राहुल गाँधी का युवक कांग्रेस की सफाई का प्रयास सफल होगा

राहुल गाँधी का कांग्रेस को बदलने का प्रयास अगर सफल होता है तो इस देश में राजनीती को एक नयी दिशा मिलेगी . राहुल गाँधी ने एक गैर सरकारी संघठन को जिसके मुखिया भूतपूर्व चुनाव आयुक्त लिंगदोह हैं को युवक कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव लड़ने वालों का इतिहास जांचने का काम दिया है . उनका निर्देश है कि कोई भी व्यक्ति जिसकी छवि अच्छी नहीं है उसे संगठन में जगह न मिले. इस कार्य का प्रारंभ उन्होंने युवक कांग्रेस के चुनावो से किया है . पुदुचेरी में एक संदिघ्द छवि वाले को चुनाव नहीं लड़ने दिया गया .

उन्होंने इस संस्था को एक प्रतिभा ढूँढने का काम भी दिया है जिससे ऐसे लोग जो राजनीती में अच्छा काम करना चाहते हैं लेकिन आजकी स्तिथि देखकर नहीं आते उन्हें प्रोत्साहित किया जायेगा. अब युवाओं का प्रवेश व्यक्ति पूरक होगा न कि किसी के दबाव में .
लेकिन जो अभी भी दागी छवि वाले लोग पार्टी में हैं उनके बारे में ज्यादा उल्लेख नहीं है .

हैप्पी आवर किसके लिए हैप्पी है ?

आजकल ज्यादातर मदिरालयों के बाहर हैप्पी आवर के बोर्ड दिखाई दे जायेंगे . इनका समय दिन के ११ बजे से शाम के ६ बजे तक हो सकता है . छूट का प्रतिशत भी २५ से ५० प्रतिशत हो सकता है . इस तरह का आमंत्रण दिन में भी नशा करने को प्रायोजित कर रहा है . जब दिन में भी इतनी छूट देकर मुनाफा कमाया जा सकता है तो रात को कितना मुनाफा होता होगा ? कहीं न कहीं ग्राहक को चूना भी लगाया जा रहा होगा ये कैसे यह खोज का विषय हो सकता है . सबेरे सबेरे से जो पीने लगे उसका और उसके परिवार का क्या होगा ! इस गोरख धंदे में सरकार की भी भागीदारी है .

मंगलवार, 21 जुलाई 2009

अपनी धरती में ही डॉ कलाम से दुर्व्यवहार दुर्भाग्यजनक

नई दिल्ली के हवाई अड्डे पर विदेशी विमान कर्मयिओं ने डॉ कलाम की तलाशी ली. डॉ कलाम के साथ हुई घटना वाकई देश के लिए दुर्भाग्यजनक है और ये इसलिए भी और दुर्भाग्यजनक है क्योंकि इसी धरती पर हुई . एक अदना सी विमान कंपनी की यह हरकत बर्दाश्त से बाहर है . क्या उन्हें प्रोटोकॉल का पता नहीं ?
कुछ वर्षों पहेले ऐसा ही वाकया जॉर्ज फ़र्नान्डिस के साथ हुआ था जब वो विदेश मंत्री थे . जब तक हमारी सरकार इस मुद्दे को अमेरिकी सरकार तक ठीक से नहीं उठाती तब तक ऐसा होता ही रहेगा.

naari samman

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शनिवार, 18 जुलाई 2009

पूरब पश्चिम का मिलन

क्या आप ब्लोगोह्लिक या ब्लोगोमेनिअक तो नहीं हो रहे ?

यदि आप दिन रात ब्लॉग से लगे रहते हैं या ६ से ८ घंटा इसी क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं तो ये मेनिया के लक्षण हैं . आपकी सुबह प्रारंभ और रात्रि अंत ब्लॉग से हो तो भी आप इस श्रेणी में आते हैं .

अगर आप दिन में कम से कम दो बार ब्लॉग जगत में घूम रहे हैं हर बार २-३ घंटे तो माने आप अल्कोहोलिक हो गए .

इस अवस्था को लाने के कुछ प्रायोजक भी हैं जो लोगों को इस दुनिया में पहुंचाकर खुद गायब हो जाते हैं . ये हैं ब्लॉग वाइरस जो इस रोग को फैला कर खुद अप्रभावित रहते हैं . इसका कोई इलाज भी नहीं है .

ब्लोगोस्फिअर की इस दुनिया में नित नए लक्षण जुड़ते रहते हैं

ब्लोगेरिया

ईमेलिया

ब्लोगोफोबिया

गुरुवार, 16 जुलाई 2009

ऐसे तो हो चुका नक्सलवाद का इलाज

राज्यपाल द्वारा बुलाई गई बैठक को एक प्रभावशाली नेता ने निरस्त करवा दिया. ऐसे तो होने से रहा कोई काम. छत्तीसगढ़ के राज्यपाल ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी नक्सल समाया के बारे में . पहले तो कांग्रेस में ही सर फुट्टवल होने लगी बैठक के बहिस्कार को लेकर और अंत में ये हासिल हुआ। कांग्रेस क्या इस राज्य के लोगों को बेवकूफ समझती है । अभी हाल फिलहाल में दो चुनाव हार कर भी चैन नही आया तो अपने आकाओं से राष्ट्रपति शासन की मांग कर डाली । भइया पहले अपने घर का नेता तो चुन लो फिर गद्दी की तैयारी करना । आज पहली बार चिदंबरम ने स्वीकार किया की देश की सबसे बड़ी समस्या नक्सलवाद है । अपने राज्य के नेताओं को भी जरा समझा दें ये बात जो सिर्फ़ राज की बात सोचते हैं जनता की नही । अबूझमाड़ के द्वार बंद कर के आदिवासियों को उनके हाल पर ३० साल तक छोड़ने वाले कौन ? ६ साल के अलावा इस राज्य में आज तक शासन किसने किया ( पुराने मध्य प्रदेश को मिलाकर ) ? वाम दलों से समझौता किसने किया जो नक्सलवादियों के समर्थक हैं ? चुनाव से पहले नागा केंद्रीय दल को हटाने का कारण क्या था ? कहने को तो राज्य की आतंरिक सुरक्षा का जिम्मा राज्य सरकार का होता है लेकिन वो एक भी सिपाही केन्द्र की अनुमति के बिना नही रख सकती । हथियारों की तो बात ही नही करें प्रथम विश्व युद्ध के हथियार लेकर ऑटोमेटिक से लड़ना तो आम आत्महत्या करना ही है । पड़ोस का दुश्मन तो दिखाई देता है घर का दुश्मन लंका ढाये । राहुल भइया आप ही कोई क्लास लो अपने नेताओं की .

मंगलवार, 14 जुलाई 2009

और आसमान भी रो पड़ा

आप में से कई आस्तिक होंगे और कई नास्तिक . मैं पहले नास्तिक था और अब आस्तिक हूँ . हम बहुत बेताबी से बारिस का इन्तेजार कर रहे थे लेकिन पता नहीं थी ऐसे आएगी बारिश. आई और ऐसा लगा आसमान भी रो रहा है उसने अपना अपना एक काबिल पुत्र खो दिया और बेबस और बेजार देखती रही वोह . इसे दूर से देख पाना संभव नहीं है क्योंकि हालत और व्यक्ति में सामंजस्य बैठाना मुस्किल है . किसी ने जानकारी चाही है एक युवा अधिकारी के बारे में . वो कहीं से पुलिसिया नहीं थे ? आज तक मीडिया ने किसी से असम्बद्ध होकर इतने आंसू नहीं बहाए. प्रकृति ने भी सिर्फ एक अवकाश दिया क्रिया कर्म का उसके पहले और बाद जो बारिश आज रायपुर में हुई वर्षों से नहीं दिखाई दी !

रविवार, 12 जुलाई 2009

छत्तीसगढ़ का खून बंगाल से सस्ता

बंगाल के एक गाँव में नक्सलवादियों ने कब्जा कर लिया ओर सारे देश की फौज दौड़ पड़ी ? इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने भी अपना रोल निभाया ऐसा लगा देश पर हमला है . छत्तीसगढ़ में कश्मीर से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं ओर केंद्र सो रहा है . ऐसा क्यों ? सिर्फ इस लिए क्योंकि यहाँ की जनता ने कांग्रेस को वोट नहीं दिया . ये तो अंग्रेजों से भी भयावक स्तिथि है . यहाँ के कांग्रेसी नेता राज्य सरकार पर ठीकरा फोड़ने में लगे हैं जबकि केंद्र ने इसे आतंकवाद की संज्ञा दी है . अँधा भी जान सकता है कौन है इसके पीछे .

शनिवार, 11 जुलाई 2009

अतुल्य भारत - उदयपुर की जय हो

अमेरिका की प्रतिष्ठित पर्यटन पत्रिका Travel and Leisure magazine ने उदयपुर को विश्व के सर्वोत्तम शहर के सम्मान से नवाजा है . राजस्थान का ये शहर, दक्षिण एशिया का पहला शहर है, यह सम्मान प्राप्त करनेवाला . इसका चयन पाठक उपलब्ध सुख सुविधाओं के आधार पर करते हैं .

शुक्रवार, 10 जुलाई 2009

ममता की रेल, वही रेलमपेल

रेल विभाग ने छत्तीसगढ़ को फिर अंगूठा दिखा दिया . कोई नयी बात नहीं क्योंकि न यहाँ के लोग स्टाप या ट्रेन बंद होने पर आग लगाते हैं या जहाँ लाल झंडे से डरकर रेलवे खुद बंगाल में अपना सञ्चालन बंद कर देता है . यहाँ अगर कभी रेल रोको आन्दोलन हुआ भी तो केस दर्ज हो जाता है , बंगाल में कितने केस दर्ज हुए ? अगर क्षेत्रीयता की बात छोड़ भी दी जाये तो रेलवे कितने राष्ट्रीय मुद्दे पर काम करता है . कोल्कता से मुंबई वाया नागपुर माल भाड़े के यातायात का इतना दबाव है कि पैसेंजर ट्रेनों को लेट चलाया जाता है ओर माल यातायात का गलियारा कहीं ओर बनाया जाता है . भिलाई स्टील प्लांट जो कि इस देश का एक बहुत बड़ा संस्थान है ओर जिसने सैल को संकट से उबारा था उसके संसाधन परिवहन की योजना दशकों से लंबित है कब जागेगी इस देश की सर्कार जब ये कारखाना बंद होने लगेगा .
ममताजी ने एक ओर दूर की कौडी लायी है लम्बी दूरी की बिना रुके ट्रेन ! जहाँ राजधानी एक्सप्रेस को समय से चलने के लाले हैं वहां कितनी सफल होगी ये योजना . शायद ममता की निगाह उड्डयन मंत्रालय पर है, वैसे भी एयर इंडिया की हालत ख़राब है.
हमारे एक नेताजी ने एक सलाह भी दे डाली कि छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली इन ट्रेनों की सफाई के लिए यहाँ स्टाप बनाया जाये . वाह भाई वाह अब छत्तीसगढ़ अपनी मजदूरी में एक नया अध्याय जोड़ ले सफाई का ?