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मंगलवार, 2 फ़रवरी 2010

अमन की आशा , जी नहीं यहाँ न मैं ब्लॉग जगत की बात कर रहा हूँ , न महाराष्ट्र की

कुछ दिनो से टीवी में एक विज्ञापन आ रहा है , कुछ अलग सा.  "अमन की आशा"
दरअसल यह एक प्रयास है , "टाइम्स ऑफ इंडिया" और पाकिस्तान के"जंग" समूह का दो देशों के बीच  मैत्री एवं सदभावना का . अच्छा प्रयास है की दो पड़ोसी अच्छे रिश्ते बना सकें . इस प्रयास का महत्व इस लिए भी बढ़ जाता है कि यह कोई राजनैतिक प्रयास नहीं है . दोनों देशों के प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूहों का है .
जितना खून इन देशों में बहा है आजादी के बाद , विभिन्न कारणों से शायद ही इतना रक्त पात कभी इस धरा पर हुआ हो . अंग्रेजों ने अपनी राजनीति खेली और सफल रहे वही खेल हमारे कुछ लोगों ने सीख लिया और आजाद होते हुए भी पड़ोसी देश नफरत और हिंसा का जहर पीते रहे .इन का प्रयास कितना सफल होगा यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन आम आदमी तंग आ चुका है इस हिंसा से .
कुछ लोग इन प्रयासों से सहमत नहीं भी होंगे क्योंकि उनकी दुकान बंद हो जाएगी . लेकिन इनकी दुकानदारी
से ज्यादा जरूरी है अमन और चैन


aman ki asha

बुधवार, 16 दिसंबर 2009

क्या इस देश में रहकर अपनी आवाज बुलंद करने के लिए एक अंग्रेजी ब्लॉग बनाना जरूरी है

क्या इस देश में रहकर अपनी आवाज बुलंद करने के लिए एक अंग्रेजी ब्लॉग बनाना जरूरी  है .
मुझे तो लग रहा है हाँ . क्योंकि आज भी इस देश की विचारधारा को अंग्रेजी के अख़बार ज्यादा प्रभावित  करते हैं बजाया हिंदी और   अन्य भाषाओँ  के .

शनिवार, 22 अगस्त 2009

इंसान से अच्छे तो कुत्ते ही हैं शायद इसमें कोई विवाद नहीं होगा

मैं यहाँ क्षमा याचना करता हूँ स्वान श्रेणी से उनकी इंसान से तुलना करने के लिए .
लोगों ने क्या मुहावरा बन रखा है कुत्ते की मौत मरना. कभी कोई नहीं कहता इंसानों की मौत मरना . क्योंकि आजकल कोई भी स्वाभाविक मौत नहीं मरना चाहता या उसके रिश्तेदार नहीं मरने देते . मृत्यु और बीमारी भी अब एक status symbol बन गया है अगर आप बीमार हैं तो कहीं भरती हैं या अधोगति को प्राप्त हुए तो कहाँ से प्रस्थान हुआ ये आज यह अत्यावश्यक है नहीं तो आपका समाज में स्तर कम हो जायेगा .
कुत्ते की मौत मरना याने असम्भावित दुर्दांत रूप से मरना होता था . आजकल कि व्यवस्था में यह सामान्य प्रक्रिया हो गयी है इंसान के लिए .
दो दिनों के लिए युवराज इस देश के हमारे राज्य में हैं उन्हें इतने जल्दी ही पता चल गया कि राज्य सरकार अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुँच पा रही है और भ्रस्ताचार हो रहा है . उन्हें ये कौन बताएगा कि ३० साल से उनकी पार्टी ने ही ये पहुँच बंद कर रखी थी . और ये उनके पिता के समय भी नहीं पहुँच रही थी .

उधर दूसरी बड़ी पार्टी में चिंतन चल रहा है ? बड़ा अच्छा शब्द है लेकिन यथार्थ से कोसूं दूर

इस देश में अगर जनता जाग भी गयी तो आज कौन है नेत्रुत्व्या प्रदान करने के लिए ?

शनिवार, 11 जुलाई 2009

अतुल्य भारत - उदयपुर की जय हो

अमेरिका की प्रतिष्ठित पर्यटन पत्रिका Travel and Leisure magazine ने उदयपुर को विश्व के सर्वोत्तम शहर के सम्मान से नवाजा है . राजस्थान का ये शहर, दक्षिण एशिया का पहला शहर है, यह सम्मान प्राप्त करनेवाला . इसका चयन पाठक उपलब्ध सुख सुविधाओं के आधार पर करते हैं .