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मंगलवार, 2 फ़रवरी 2010

अमन की आशा , जी नहीं यहाँ न मैं ब्लॉग जगत की बात कर रहा हूँ , न महाराष्ट्र की

कुछ दिनो से टीवी में एक विज्ञापन आ रहा है , कुछ अलग सा.  "अमन की आशा"
दरअसल यह एक प्रयास है , "टाइम्स ऑफ इंडिया" और पाकिस्तान के"जंग" समूह का दो देशों के बीच  मैत्री एवं सदभावना का . अच्छा प्रयास है की दो पड़ोसी अच्छे रिश्ते बना सकें . इस प्रयास का महत्व इस लिए भी बढ़ जाता है कि यह कोई राजनैतिक प्रयास नहीं है . दोनों देशों के प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूहों का है .
जितना खून इन देशों में बहा है आजादी के बाद , विभिन्न कारणों से शायद ही इतना रक्त पात कभी इस धरा पर हुआ हो . अंग्रेजों ने अपनी राजनीति खेली और सफल रहे वही खेल हमारे कुछ लोगों ने सीख लिया और आजाद होते हुए भी पड़ोसी देश नफरत और हिंसा का जहर पीते रहे .इन का प्रयास कितना सफल होगा यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन आम आदमी तंग आ चुका है इस हिंसा से .
कुछ लोग इन प्रयासों से सहमत नहीं भी होंगे क्योंकि उनकी दुकान बंद हो जाएगी . लेकिन इनकी दुकानदारी
से ज्यादा जरूरी है अमन और चैन


aman ki asha