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रविवार, 15 नवंबर 2009

ये स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया है स्टेट बैंक ऑफ़ maharshtra नहीं

 जैसा  की होता है अलगाववादी ताकतों ने फिर से मांग की है कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में महाराष्ट्रियन  लोगों को ही नौकरी मिलनी चाहिए . शायद यह मांग करने वाले भूल गए कि यह एक राष्ट्रीय बैंक है प्रांतीय नहीं . इसी तरह के झगडे रेल सेवा के समय भी दिखाई  देते हैं . कौन है  इन झगडों का जिम्मेदार . व्यवस्था जो देश को बांटती है राज्य और जाती के नाम से और जनता खुश होती है इस को देखकर . विभाजन करो और राज करो . राज यानि राज ठाकरे भी वही कर रहा है . इस देश में शायद देश द्रोह का कोई कानून और सजा नहीं है .