शनिवार, 6 मार्च 2010

क्या नन्दन निलेकनी प्रीमियम एसएमएस के जरिये देश की गरीब जनता से सवाल पूछ रहे हैं ?

मोबाइल फोन के गिरते हुए काल रेट से परेशान इन कम्पनियों ने नए नए तरीके ढूँढे हैं . इनमे सबसे पहले शामिल हुए टीवी सिरियल जो एसएमएस के जरिये वोट माँगते हैं . एक एसएमएस तीन रुपए का . आगे बढ़ते हुए प्रतियोगिता प्रारंभ हुई "इन्हे पहचानिए" इत्यादि . पहचान सरल आप प्रतीक्षा कर रहे हैं मुख्य व्यक्ति से बात करने की और आपके बिल में 16 जी हाँ 16 रुपए प्रति मिनट जुड़ रहे हैं.. जानकारों का कहना है यह काल तबतक चलती रहती है जबतक कोई और मुर्गा न फंस जाए या आप काल काट दें.

इस धंधे में अब एफ़एम रेडियो और अख़बार भी शामिल हो गए हैं.एक बड़े अख़बार में जब इस तरह का विज्ञापन देखा तो चौंकना स्वाभाविक  था . नन्दन निलेकनी जिन्हे uid(राष्ट्रीय पहचान पत्र) प्रोजेक्ट का मुखिया बनाया गया है जनता से तीन सवाल पूछ रहे हैं एसएमएस के जरिये .! जिनके साथ पूरे देश की सरकार शामिल है और हजारों करोड़ का बजट जिन्हे दिया गया है वो इस तरह का काम क्यों कर रहे हैं ?
अगले साल ऐसे भी जनगणना होने वाली है जिसमे जनता के विचार भी आजकल जाने जाते हैं ,सरकार द्वारा, विभिन्न विषयों में फिर ऐसे प्रायोजित कार्यक्रम की क्या जरूरत आन पड़ी . इस तरह के प्रायोजित एसएमएस में पैसा बटता है प्रायोजक और मोबाइल कंपनी के बीच. नन्दन निलेकनी क्या इस कार्य में शामिल हैं , लगता तो नहीं है .

6 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

आपका सोचना सही हो सकता है. एक छोटी सी और सीधी सी बात के लिये इतना ढ़कोसला.अठारह वर्ष से ऊपर के हर व्यक्ति को एक यूआईडी देना थी जिसका नम्बर हर विभाग से सम्बद्ध रहता. उस पर बायो-मीट्रिक पहचान रहती. पूरा डाटा इस कार्ड से हासिल हो जाता. लाइसेंस, शिक्षा, कार्य, उम्र, पता, पैन, धर्म-आरक्षण इत्यादि सब का.

संगीता पुरी ने कहा…

बेचारी जनता मार्केटिंग जाननेवाले इन लोगों के छलावे में आ जाती है .. भगवान भी तो उनका मालिक नहीं !!

S B Tamare ने कहा…

सिन्हा जी ,
होली की मुबारकबाद देर से ही सही मगर कबूल करे /
आपके अंदेशो से बदहवाशी तो हमें भी तारी हो रही है की पता नहीं कौन सी आशंका सच्च साबित होगी /
आपका शुक्रिया जो आपने इस बाबत हमें आगाह किया /

Anil Pusadkar ने कहा…

पता नही क्या क्या बेचेंगे?

Udan Tashtari ने कहा…

अजब लूट है..

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सही कहा सिन्हा जी , यह तो अपना घर फूंक तमाशा देखने वाली बात है।
ज़ाहिर है , बेवक़ूफ़ तो पब्लिक ही है।