सोमवार, 24 मई 2010

एक चपरासी की भी मेडिकल जाँच होती है नौकरी पाने के लिए

मेरे इस पोस्ट का मन्तव्य किसी वर्गीकरण से नहीं है , चपरासी शब्द  केवल उदाहरण के लिए प्रयुक्त है

इस देश में हर चीज पर कुछ न कुछ प्रतिबंध या आवश्यक योग्यता निर्धारित है .
विवाह की कानूनी सीमा , उम्र के हिसाब से.
स्कूल/कॉलेज  में न्यूनतम और अधिकतम उम्र सीमा.
हर तरह की  सरकारी नौकरी में भी न्यूनतम और अधिकतम उम्र सीमा .
हर जगह चिकित्सा जाँच भी होती है ?
हर जगह गति अवरोधक लगे हैं .





एक जगह को छोडकर  " राजनीति "
सार्वजनिक राजनीति में 18 वर्ष के होते ही संभावनाओं के द्वार खुल जाते हैं . इसके बाद कोई भी किसी भी प्रकार  का अवरोध नहीं है न उम्र का न शिक्षा का न स्वास्थ्य का  . राजनीति का  प्रशिक्षण भी स्कूल कॉलेज से शुरू हो जाता है . खुद को क्या सुविधा मिलनी चाहिए ये भी स्वयम निर्णीत होता है . और किसी सरकारी सेवक को 1 दिन की नौकरी पर पेंशन नहीं मिलती जबकी ये जन सेवक हैं इन्हे यह सुविधा उपलब्ध है  ? खुली बंदरबांट है .

जहाँ सबसे ज्यादा कड़ी जाँच होनी चाहिए वहीं कोई नियंत्रण नहीं . कौन आपके राज्य या देश को चलाएगा उसपर कोई रोक टोक नहीं .

कब होगा आजाद  हमारा देश अंग्रेजों के बनाये दासता कानूनों से ?

क्या यही है मेरा भारत महान

जय हो जय हो गाते रहो (जनता)
चैन की बंशी बजाते रहो (नेता)

9 टिप्‍पणियां:

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

और इन हरामखोरों की नहीं होती .... हा-हा-हा

शिक्षामित्र ने कहा…

मतदाता हम आप ही हैं। दोष किसे दिया जाए?

राजकुमार सोनी ने कहा…

अच्छी पोस्ट विचारणीय मुद्दा।

राज भाटिय़ा ने कहा…

इन कुत्तो की जांच हर साल होनी चाहिये, लेकिन जब मत दाता ही इन्हे अपना अन्न दाता मानते है तो क्या करे, पहले जनता को दिमागी तॊर पर गुलामी से बाहर आना होगा...... फ़िर इन से पुछे इन की ऒकात

डॉ महेश सिन्हा ने कहा…

राजकुमार सोनी ने आपकी पोस्ट " एक चपरासी की भी मेडिकल जाँच होती है नौकरी पाने के ... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

अच्छी पोस्ट विचारणीय मुद्दा।


गूगल के किन्ही तकनीकी कारणो से यह टिप्पणी प्रकाशित नहीं हो सकी थी

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

वाकई इन हरामखोरों की नही होती, क्योंकि करवाने वाले ये खुद हरामखोर ही हैं.

रामराम.

Udan Tashtari ने कहा…

जय हो जय हो गाते रहो (जनता)
चैन की बंशी बजाते रहो (नेता)

-यही करना पड़ेगा और क्या!

vinay ने कहा…

राज्य और देश चलाने वालों की जाँच ना होने के कारण ही तो आम साधारण नागरिक पिस रहा है,इन लोगो के भ्रष्ट आचरण के कारण ही तो आंम इन्सान भ्रष्टाचार में लिप्त हो रहा है।
समाचार पत्र उठा कर देखो,सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आक्षेप लगाते हुये नज़र आते है,राष्ट्रहित में कभी इनकी आम सहमति ही नही बनती ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सच है ।