रविवार, 15 नवंबर 2009
ये स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया है स्टेट बैंक ऑफ़ maharshtra नहीं
जैसा की होता है अलगाववादी ताकतों ने फिर से मांग की है कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में महाराष्ट्रियन लोगों को ही नौकरी मिलनी चाहिए . शायद यह मांग करने वाले भूल गए कि यह एक राष्ट्रीय बैंक है प्रांतीय नहीं . इसी तरह के झगडे रेल सेवा के समय भी दिखाई देते हैं . कौन है इन झगडों का जिम्मेदार . व्यवस्था जो देश को बांटती है राज्य और जाती के नाम से और जनता खुश होती है इस को देखकर . विभाजन करो और राज करो . राज यानि राज ठाकरे भी वही कर रहा है . इस देश में शायद देश द्रोह का कोई कानून और सजा नहीं है .
शनिवार, 14 नवंबर 2009
हिन्दी बोलिए दिमाग तेज करिये
ये मैं नहीं कह रहा हूँ , एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण कह रहा है . लोगों को हिन्दी और अंग्रेजी पढने और बोलने कहा गया . साथ ही साथ उनकी मस्तिष्क की गतिविधियों की जांच की गयी . पाया गया कि हिन्दी पढने और बोलने के लिए दिमाग के दाएं और बाएँ दोनों हिस्सों का इस्तेमाल होता है जबकि अंग्रेजी पढने के लिए केवल बाएँ भाग का . शोधकर्ताओं का कथन है ऐसा इस लिए होता है क्योंकि हिन्दी पढने के लिए ऊपर नीचे पढ़ना पड़ता है, मात्राओं के कारण, जबकि अंग्रेजी सपाट भाषा है .
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2009
बढ़ता देशद्रोह कौन जिम्मेदार इसके लिए
कौन है इसका जिम्मेदार ? क्या कोई व्यवस्था है इस देश में जो इस देशद्रोह को पनपने देने के लिए जिम्मेदार लोगों को रेखानाकित करेगी और उन्हें उनके कर्मों की सजा देगी ? इतना सब होने के बाद भी केंद्र सरकार के मंत्री विरोधाभासी बयां दे रहे हैं . आज बयां आता है गृह मंत्री का कल किसी और तरह का और मंत्री या सेना अध्यक्ष का अलग . क्या दिशा है है इस सरका की एक नीति बना के तो चले . राजधानी एक्सप्रेस को अगवा कर लेना कोई छोटी मोटी घटना नहीं है . लेकिन इससे भी बड़ी घटना है कि नेपथ्य में क्या हुआ? जिससे इस तरह लोगों को छोड़ दिया गया . आज सारी सुरक्षा कुछ गिने चुने लोगों की बीच केन्द्रित हो गयी है . कुछ तो वाकई इसके हकदार हैं लेकिन बहुतेरे चवन्नी छाप भी इसका फायदा उठा रहे हैं . जो नेता अपनी जनता से मिलने में घबराता है या सुरक्षा घेरे में मिलता हैं उसे तो चुल्लू बहर पानी में डूब मरना चाहिए . अमेरिकी राष्ट्रपति से भी जादा असुरक्षित मानते है ये अपने को.
कई बार लगता है हम अपना तनाव व्यर्थ में बढा रहे हैं उन घटनाओं से जिनका हमारी जिन्दगी से सीधा सम्बन्ध नहीं है लेकिन फिर यही लगता है यह बर्दास्त के बाहर है और विरोध तो होना ही चाहिए .
मैं गांधी वादी नहीं हूँ लेकिन गाँधी की एक बात सटीक रही कि लगे रहो .
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2009
नंगा नंगा खेलें हम
न बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपैया यह तो साबित कर दिया बिग बॉस ने . एक विवाहित महिला जो कि अंतर्राष्ट्रीय श्रीमती का सम्मान पा चुकी है, खुले आम एक पर पुरुष के अंतर्वस्त्र उतारते हुए . और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को तो मसाला मिल गया क्योंकि अभी तक वोह फ़िल्मी दुनिया के बारे में सुनाते ही रहे हैं अब देख भी लीजिये ये किस हद तक जा सकते हैं . जब ये सब कैमरा के सामने हो रहा है तो पीछे तो भगवान मालिक है . बड़ी प्रतिक्रियाएं हो रही हैं , सरकार ने भी चैनल को नोटिस थमा दिया है . लेकिन ये सब कुछ नया तो नहीं है . पहेले फिल्मों की काल्पनिक कथाओं के द्वारा अन्तरंग दृश्य दिखाए जाते रहे और अब छोटे परदे के द्वारा यह आपके घर तक घुस आया. समाचारों में भी बखान किया जा रहा है कि ये टॉप में चल रहा है . सबसे ज्यादा लोग इसे ही देख रहे हैं . सदी के महानायक इसके सूत्रधार इस कहानी में अपने मेहमानों को इसके विवादस्पद सीन दिखाकर आनंद ले रहे हैं . पता नहीं श्री हरिवंश रॉय बच्चन की आत्मा कौन सी नयी मधुशाला लिख रही होगी . आज ही एक ब्लॉग में मैंने पढ़ा कैसे
इस देश के लोग अपने ही देश के दूसरे क्षेत्रों के लोगों से नीचता पूर्ण व्यवहार करते हैं . कहाँ है हमारी संस्कृति जिसका हम ढपोरशंख बजाते रहते हैं . यही दोमुही स्तिथि हमें कहीं का नहीं रख रही है . आज हमारा समाज एक संक्रमण काल में खडा है . जहाँ से आगे कहाँ जाना है पूरी तरह से व्यक्तिगत होता जा रहा है . कुछ दिनों पहले एक रेस्तरां के बाथरूम में दो युवा खुले आम अंतरंगता की बात कर रहे थे . रायपुर जैसे मझोले शहर का यह हाल है तो महानगरों का तो ............. कोई आज दिशा दिखने वाला नहीं बचा है इस देश को . पैसा पैसा पैसा बस एक अमोघ अस्त्र बचा है जिसके पीछे सब भागे जा रहे हैं . यह गैरजरूरी है कि यह कैसे आ रहा है . इसीकी परिणित है झिलमिलाते परदों की कहानियां . बाजार का नियम है वह वही वस्तु बनाएगा जो बिक सकती है . और आज क्या बिक रहा है सब देख रहे हैं . गलती किसीकी की नहीं है क्योंकि चुपचाप देखते रहना हमारी
आदत में सदियों से शुमार है .
इस देश के लोग अपने ही देश के दूसरे क्षेत्रों के लोगों से नीचता पूर्ण व्यवहार करते हैं . कहाँ है हमारी संस्कृति जिसका हम ढपोरशंख बजाते रहते हैं . यही दोमुही स्तिथि हमें कहीं का नहीं रख रही है . आज हमारा समाज एक संक्रमण काल में खडा है . जहाँ से आगे कहाँ जाना है पूरी तरह से व्यक्तिगत होता जा रहा है . कुछ दिनों पहले एक रेस्तरां के बाथरूम में दो युवा खुले आम अंतरंगता की बात कर रहे थे . रायपुर जैसे मझोले शहर का यह हाल है तो महानगरों का तो ............. कोई आज दिशा दिखने वाला नहीं बचा है इस देश को . पैसा पैसा पैसा बस एक अमोघ अस्त्र बचा है जिसके पीछे सब भागे जा रहे हैं . यह गैरजरूरी है कि यह कैसे आ रहा है . इसीकी परिणित है झिलमिलाते परदों की कहानियां . बाजार का नियम है वह वही वस्तु बनाएगा जो बिक सकती है . और आज क्या बिक रहा है सब देख रहे हैं . गलती किसीकी की नहीं है क्योंकि चुपचाप देखते रहना हमारी
आदत में सदियों से शुमार है .
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2009
रायपुर के गौरव पथ के कुछ चित्र
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में निर्माणाधीन गौरव पथ के एक हिस्से का कुछ दिनों पहले लोकार्पण किया गया . इसके एक ओर एक दीवाल को भित्ति चित्रों से सजाया गया है . साथ ही आदिवासी कलाकृति का मूर्तियों के रूप में प्रदर्शन किया गया है. बस्तर के एक जल प्रपात की अनुकृति भी बनाई गई है .
जल प्रपात यहाँ देखें
भारत माता
जल प्रपात यहाँ देखें
भारत माता
गुरुवार, 15 अक्टूबर 2009
मेरी देवभूमि यात्रा ७
प्रातः अपने वापसी के अंतिम पडाव हरिद्वार के लिए निकले . रास्ते में ऋषिकेश से १८ किलोमीटर पहले वशिष्ठ गुफा है. गंगा के किनारे एक अत्यंत मनोरम और शांत स्थान . किवदंती है कि इसी स्थान में वशिष्ठ मुनि ने राम जी को शिक्षा दी थी . गुफा में शिवलिंग है प्रकाश के लिए केवल दीपक की रौशनी है .कहा जाता है किसी समय में यह गुफा बद्रीनाथ और केदारनाथ से जुडी हुई थी और इनकी दूरी मात्र ७ मील थी .
ऋषिकेश में प्रसिद्ध लक्ष्मन झूला और नए राम झूला के दर्शन हुए . लोगों ने लक्ष्मन झूला को भी नहीं छोडा अपने प्रचार के लिए !
इति
ऋषिकेश में प्रसिद्ध लक्ष्मन झूला और नए राम झूला के दर्शन हुए . लोगों ने लक्ष्मन झूला को भी नहीं छोडा अपने प्रचार के लिए !
पद यात्री
यात्री जत्था बस में
सायंकाल हरिद्वार पहुंचकर गंगा जी की आरती के दर्शन के बाद रात्रि विश्राम . प्रातःकाल रेल से घर वापसी यात्रा प्रारंभ .एक पुल
ऋषिकेश के पास राफ्टिंग करते लोग
वशिष्ठ गुफा
राम झूला
लक्ष्मण झूला
गंगा जी की आरती
गंगा जी
इति
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2009
मेरी देवभूमि यात्रा ६
अगली सुबह बद्रीनाथ के लिए प्रस्थान .रास्ते में वह पुल भी पड़ा जो इस साल जून में बदल फटने के कारण बह गया था उसका निर्माण कार्य जारी है . करीब २ १/२ घंटे में बद्रीनाथ पहुँच गए .बद्रीविशालजी का मंदिर नारायण पर्वत के नीचे स्तिथ है . निकट ही नीलकंठ की चोटी है जो हमेशा हिमाच्छादित रहती है . सामने की ओर नर पर्वत है . दर्शन के बाद नाश्ता और मध्यान्ह प्रसाद ग्रहण करने के बाद अगला पडाव माना गाँव था जो कि यहाँ से करीब ४ किलोमीटर दूर है . यह इस सीमा में भारत का आखरी गाँव है. इस गाँव में गणेश गुफा, व्यास गुफा , सरस्वती नदी का उद्गम और मंदिर तथा भीम शिला हैं . कहा जता है कि व्यास मुनि ने वेदों का उच्चारण किया और गणेश जी ने लेखांकन . यह भी कहा जाता है कि पांडव महाभारत के बाद इसी दिशा से आगे बढे थे और युधिस्ठिर इसी रास्ते से स्वर्गारोहण के लिया अग्रसर हुए थे .
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टूटा पुल
श्री बद्री विशाल
हिमाच्छादित नीलकंठ
नारायण पर्वत
नर पर्वत
गणेश गुफा
व्यास गुफा
आखरी चाय की दुकान
बैंक यहाँ भी
पिट्ठू
सरस्वती नदी में इन्द्रधनुष
पूजा करते साधू
मानसरोवर की जल धारा
सरस्वती मंदिर
भीम शिला
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दूरसंचार क्रांति, आखरी मील तक संपर्क
सतोपंथ यात्रा
सरस्वती का संगम
बद्रीनाथ से वापसी
दोपहर में वापसी की यात्रा प्रारंभ हुई . रात्रि विश्राम पीपलकोटी में हुआ .
क्रमशः:
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