यूपी बिहार वालों से तंग आकर ऑस्ट्रेलिया सरकार ने मनसे के राज ठाकरे को ऑस्ट्रेलिया आने का निमंत्रण दिया है . उनका मानना है की राज ठाकरे और उनकी समस्या एक है . उन्होने राज ठाकरे से कुछ टॅक्सी ड्राइवरों की भी माँग की है जो बाहरी लोगों को भगाने में सक्षम हों .
ऑस्ट्रेलिया ने राज ठाकरे से मनसे की एक शाखा ऑस्ट्रेलिया में भी खोलने की माँग की है . उनका बयान है की उन्होने तो पैसे कमाने के लिए भारतीयों को पढ़ने आने दिया लेकिन ये मरदूद तो यहाँ बसने लगे . अब अंतर्राष्ट्रीय समाज के सामने हम तो खुल्लम खुल्ला कुछ नहीं कर सकते इसलिये महाराज पधारो म्हारी लाज बचाओ इन मवालियो से.
सुनने में आया है की राज ठाकरे ने उनकी माँग कुछ शर्तों के साथ स्वीकार कर ली है . जिसमें एक है की उन्हे मुंबई से भगाए जाने की अवस्था में ऑस्ट्रेलिया राजनीतिक शरण देगा और उनका दर्जा राजनैतिक सहयोगी का होगा ..
ऑस्ट्रेलिया लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
ऑस्ट्रेलिया लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
रविवार, 24 जनवरी 2010
शनिवार, 30 मई 2009
हम कब तक अपनी ऐसी तैसी करवाते रहेंगे
आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों के साथ दुर्व्यवहार और घातक हमलों से हम और हमारी सरकार कब सीखेंगे ? जब हम किसी और देश में जाते हैं वहाँ बसने के उद्देश्य से तो वहाँ के लोग विरोध करते ही हैं । और ऐसा केवल विदेशों में ही नही हमारे यहाँ राज्यों में भी हो रहा है । यह विरोध केवल एक संकुचित मानसिकता का परिचायक ही है । वसुधेव कुटुम्बकम तो शायद केवल लेखन तक ही सीमित रह गया है । लेकिन जब ये मानसिकता तथाकथित विकसित देशों में होती है तो सोचना पड़ता है कि विकास के मायने क्या हैं । क्या समृद्धि, सुविधा और धन ही विकास है या आपकी मानसिकता का विकास ही सच्चा विकास है । क्या एक आदर्श समाज और विश्व की परिकल्पना केवल एक दिवास्वप्न है या इसे वास्तविकता में बदला जा सकता है ?
हमारे जो भी देशवासी विदेश खासकर वहाँ बसने जाने वाले इस बात से भलीभांति परिचित रहते हैं कि उन्हें एक दोयम दर्जे के नागरिक की तरह जीना होगा और अपमान का कड़वा घूँट भी पीना पड़ेगा , इसके बावजूद ये प्रक्रिया जारी है । इसके पीछे क्या सिर्फ़ अर्थ और सुविधा ही जिम्मेदार हैं । हमारी कई प्रतिभाएं उचित अवसर नही मिलने के कारण भी विस्थापित होने को मजबूर हो जाती हैं । कब हमारी व्यवस्था इस बारे में गंभीरता से विचार करेगी । हम अगर एक गरीब और अत्यधिक आबादी के देश हैं तो हमारे यहाँ प्रतिभाओं की भी कमी नही है आवश्यकता है तो सिर्फ़ इस अमूल्य ज्ञान धन को उचित अवसर प्रदान करने की ।
आस्ट्रेलिया की घटना से दुखी होकर अमिताभ बच्चन ने वहां के एक विश्विद्यालय द्वारा प्रदान किए जाने वाला सम्मान ठुकरा दिया है । विदेशों में रहने वाले उच्च स्तिथि प्राप्त भारतीय भी उनका अनुकरण करें तो वे अपनी मातृभूमि के लिए एक आदर्श बनेंगे ।
हमारे जो भी देशवासी विदेश खासकर वहाँ बसने जाने वाले इस बात से भलीभांति परिचित रहते हैं कि उन्हें एक दोयम दर्जे के नागरिक की तरह जीना होगा और अपमान का कड़वा घूँट भी पीना पड़ेगा , इसके बावजूद ये प्रक्रिया जारी है । इसके पीछे क्या सिर्फ़ अर्थ और सुविधा ही जिम्मेदार हैं । हमारी कई प्रतिभाएं उचित अवसर नही मिलने के कारण भी विस्थापित होने को मजबूर हो जाती हैं । कब हमारी व्यवस्था इस बारे में गंभीरता से विचार करेगी । हम अगर एक गरीब और अत्यधिक आबादी के देश हैं तो हमारे यहाँ प्रतिभाओं की भी कमी नही है आवश्यकता है तो सिर्फ़ इस अमूल्य ज्ञान धन को उचित अवसर प्रदान करने की ।
आस्ट्रेलिया की घटना से दुखी होकर अमिताभ बच्चन ने वहां के एक विश्विद्यालय द्वारा प्रदान किए जाने वाला सम्मान ठुकरा दिया है । विदेशों में रहने वाले उच्च स्तिथि प्राप्त भारतीय भी उनका अनुकरण करें तो वे अपनी मातृभूमि के लिए एक आदर्श बनेंगे ।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)