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सोमवार, 4 अक्टूबर 2010

क्या गूगल बज, एक ब्लॉग अग्रीगेटर की भूमिका निभा सकता है

Google Buzz

बहुत से ब्लॉगर इस मंच से जुड़ चुके हैं । अभी इस माध्यम में कार्य और विकास चल रहा है । यह हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं में अपनी सेवा उपलब्ध करा रहा है । इसमे शामिल होने से आपके ब्लॉग समर्थक अपने आप इससे जुड़ जाते हैं । हिन्दी ब्लॉग संकलको से आए दिन परेशान होने वाले ब्लॉगर इस मंच का उपयोग अपने ब्लॉग को अन्य लोगों तक  पहुँचाने के लिए कर सकते हैं ।

कई बार तो इसमें बड़े ही मजेदार संवाद भी हुए हैं
एक झलक यहाँ देखिये 

ज्यादा जानकारी यहाँ उपलब्ध है
 http://www.google.com/buzz


क्या लगता है आपको

सोमवार, 3 मई 2010

गूगल ने "चड्डी पहन के फूल खिला है" पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की

गूगल ने अंतराष्ट्रीय भाई चारे की मिसाल पेश करने और बज को उसके अंजाम तक पहुँचाने वालों को सम्मानित करने की घोषणा की  है .
इस पुरस्कार में कोई पहला दूसरा स्थान नहीं है . गूगल ने दरियादिली दिखाते हुए इस मुहिम का विरोध करने वालों को भी सम्मानित किया है .

यह सम्मान "चड्डी पहन के फूल खिला है"$  कहलाएगा

इस सम्मान के बराबर के हकदार  हैं *:


आराधना चतुर्वेदी "मुक्ति"
Praveen Pandey
अजित वडनेरकर
Dr. Mahesh Sinha
Sanjeet Tripathi
Saagar Saagar
Rajeev Nandan Dwivedi
Pankaj Upadhyay
Stuti Pandey
Sameer Lal
पद‍्म सिंह
Prashant Priyadarshi
श्रीश पाठक (Shreesh K Pathak)

Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा
अविनाश वाचस्पति
sarwat jamal
Vivek Rastogi
HIMANSHU MOHAN
SANGITA PURI
rajesh swarthi
sanjay tiwari
Tarun J
Mukul Srivastava
Jitendra Chaudhary
Rakesh Jangalwa
kamlesh verma
Dr. Vijay Tiwari
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
Gajender Bisht
indu puri goswami
ajay jha
Sagar Nahar

भूल चूक लेना देना

* अगर किसी प्रतियोगी का नाम छूट  गया हो तो सूचित करें
$ प्रतिभागी इसे ही कापी करके पुरस्कार ग्रहण करें

रविवार, 2 मई 2010

गूगल ने हाथ खड़े किए , उसकी औकात पता चल गयी

गूगल ने कुछ समय पहले बज नामक सुविधा प्रारंभ की थी .तब और अब तक यह नहीं घोषित किया गया था की इसकी कोई शब्द सीमा है . पिछले कुछ दिनो में उसने दो बज को ब्लाक कर दिया और दिखाया यह जा रहा है की बज प्रारंभ करने वाले ने ऐसा किया है .
ब्लाग में भी ऐसी कोई सीमा है तो उसके  बारे में जानकार लोग बताएंगे . मेरी जानकारी में तो नहीं है की स्थान के अभाव में कोई ब्लाग ब्लाक किया गया है
देखिये उन दो बज को जो ब्लाक हो गए याने इनपर कोई टिप्पणी अब नहीं दी जा सकती . केवल पसंद का चटका लगाया जा सकता है .

पहला बज है पंकज उपाध्याय का 

इस बज़ को अपने अपने अजायबघर मे सजाने के लिये ये लिन्क देखे:

Buzz by Pankaj Upadhyay

दुसरे लम्बर पे है हरदिल अजीज समीर लाल "समीर" का बज  



सोच क्या रहे हैं खुद देखें 
"हाथ कंगन को आरसी क्या 
पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या "


रविवार, 14 मार्च 2010

गूगल में कुछ सुविधायें कुछ असुविधाएँ

नए टेंप्लेट गूगल द्वारा प्रदान किए जाने के बारे में तो आप जान चुके हैं . अच्छा प्रयास है .नए पोस्ट में भी कुछ नयी चीजें गूगल ने जोड़ी हैं जैसे ट्रांसलेशन , विडियो एटेचमेंट और स्थान ( जहाँ से आप ब्लॉगिंग कर रहे हैं या संदर्भ )

इसके साथ ही बज कुछ बजबजा रहा है कमेंट करने पर एरर बता रहा है कुछ दिनो से "

रविवार, 17 मई 2009

हम ब्लॉग क्यों लिखते हैं

कुछ बातें हम अपने सुख के लिए करते हैं स्वान्तः सुखाय। कुछ हम दूसरों के लिए करते हैं परिजन हिताय । ब्लॉग लिखने में भी एक भावना निहित रहती है , जिनमे उपरोक्त दोनों या एक भाव सम्मिलित हो सकता है । इसमे कुछ भाव मित्रता के भी जुड़ जाते हैं , अनजाने दूरस्थ लोगों से परिचय और संवाद । कई लोगों के लिए ये अपनी प्रतिभा को उकेरने का मंच है तो कुछ के ज्ञानवर्धन और श्रोता बनने का मंच । एक कथन है कि अपनी भावनाओं को दबाकर नही रखना चाहिए अन्यथा वह एक विषाद के रूप में भौतिक और मानसिक शरीर को प्रभावित करती है। इसमे लेकिन एक स्वनियंत्रण भी आवश्यक है , अपनी प्रस्तुति ऐसी रहे जिससे कि किसीकी भावना पीड़ित न हो , विचार और शब्द संयत भाषा में हो । ये प्रश्न कई बार उठता है कि गूगल को ब्लॉग पर नियंत्रण रखना चाहिए , क्या ये सम्भव है ? एक साधन आपको उपलब्ध किया गया है , कुछ स्वनिय्न्त्रनो के साथ अब ये आप पर निर्भर है कि आप इसका उपयोग कै़से करते हैं । वैसे गूगल ने ये व्यवस्था भी रखी है कि अगर कोई ब्लॉग आपको अनुचित लगे तो उसकी सूचना आप उन्हें दे सकते हैं । इसमे एक विरोधाभास हो सकता है कई बातें जो हमारी सभ्यता में आपतिजनक हो , उन्हें ऐसा न लगे ।