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रविवार, 13 फ़रवरी 2011

सरकार, नक्सलवाद और बिचौलिये


अगर आप किसी बात का विरोध नहीं करते तो इसका अप्रत्यक्ष मतलब यही है की उस बात या विश्वास का आप समर्थन कर रहे हैं । यही अंतर है देशभक्ति और देशद्रोह में ।

इस देश की सबसे बड़ी विडंबना यही लगती है की इस नए माध्यम(ब्लॉग या बज) का उपयोग देश और जनकल्याण के लिए करने के बजाय और कुछ रूप में किया जा रहा है ।

हर जगह राजनीति नहीं होनी  चाहिये  लेकिन हो यही रहा है । इंसान की जान के सौदे हो रहे हैं और लोग या तो इन दुर्दांत घटनाओ का समर्थन कर रहे हैं या चुप हैं ।

इस देश में क्या कभी कोई क्रांति हो सकती है या हर बात में सौदेबाजी होगी

गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

बोये पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय - नक्सल्वाद का सच

यहाँ देखिये गृह मंत्री का बयान और नक्सलवाद का सच . आज यही अजित जोगी , रमन सिंह सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं इसके लिए .

सौजन्य : नवभारत रायपुर 

शनिवार, 2 मई 2009

ब्लॉगर दुनिया के कुछ रोचक तथ्य

एक छोटी से खोज से ब्लॉगर के सदस्यों के बारे में कुछ जानकारी प्राप्त हुई है ।
पूरे भारत में ब्लॉगर के सदस्यों की संख्या २८९००० है । नई दिल्ली के नाम से ५७०० रजिस्टर हैं । छत्तीसगढ़ के नाम ये संख्या ११०० और रायपुर के नाम २७२ है । वर्ग क्रमों के अनुसार , ये आंकडा शायद पूरी दुनिया का है । संचार और मीडिया में १९६००० , पत्रकार ७२५००, ट्रांसपोर्ट १५०००० और स्वतंत्र पत्रकार और अनुवादक २ ।

गुरुवार, 23 अप्रैल 2009

भारतीय रेल और छत्तीसगढ़

भारतीय रेल को सबसे ज्यादा धन जुटाने वाला दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे और उसमे भी आगे रायपुर डिविजन ।
लेकिन इससे होता क्या है । सारे इन्तेजाम तो दिल्ली से स्वीकार होते हैं । ४३ डिग्री तापमान में यहाँ वैसा ही गर्म पानी मिल रहा है या ठंडी लोकल बनी मिनेरल वाटर की बोतल खरीदो ।
सबसे बर्बाद सूचना व्यवस्था । अन्तिम समय में प्लेटफोर्म बदला जाना । divisional मुख्यालय होने पर भी करंट रिज़र्वेशन काउंटर की व्यवस्था नही । बाहर से आने वाले चौंक जाते हैं । हर बड़े स्टेशन में उच्च श्रेणी विश्राम कक्ष में एसी की व्यवस्था है यहाँ तो प्लेटफोर्म में पंखा नही चलता । देश का सबसे बदनाम स्टेशन टिकेट की दलाली के लिए । दलालों के लिए तो ऐसी व्यवस्था है कि आप चौंक जायेंगे । एक छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस यहाँ से गुजरती है , इस ट्रेन में एसी ३ टियर का सबसे ज्यादा कोटा एक छोटे से स्टेशन तिल्दा का है जहाँ २ मिनट गाड़ी रूकती है । ये कोटा बिलासपुर और रायपुर से ज्यादा है ? १० प्रस्ताव यहाँ से अगर जाते है तो रेलवे बोर्ड एक भी स्वीकार कर ले तो अहोभाग्य .
इतने बड़े स्टेशन में कार्ड से टिकेट लेने की भी व्यवस्था नही है ।
सुरक्षा का तो ये आलम है बाहर आते ही ऑटो और रिक्शेवाले टूट पड़ते हैं । और सामान की जिम्मेदारी तो आपकी ही होती है ।
सबसे ज्यादा माल का परिवहन यहाँ से होता है पूरे देश में और freight कॉरिडोर बनाया जा रहा है मुंबई-दिल्ली-कोल्कता के बीच, क्योंकि वो बिहार हो कर जाता है ? इस देश में सबसे ज्यादा ट्रेन चलती हैं बिहार से , अच्छा है जब कुछ काम नही तो लोगों को एक्सपोर्ट होने की सुविधा तो मिलनी चाहिए , लेकिन धन कमा कर देने वाला ये क्षेत्र छोटी छोटी जरूरतों के लिए मोहताज है ! हम ही हैं इसके लिए जिम्मेदार । शायद यहाँ से कोई एक बार रेल मंत्री बन जाए तो ही शायद उद्धार हो .