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बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

वास्तव में हमारा चरित्र क्या है

इसे अन्यथा न लें

तिरिया चरित्रम पुरुषश्य भाग्यम
देवो न जानती .............

यह लोकोक्ति कहाँ से और कैसे उपजी इसके बारे में तो इतिहासकार ही बता सकते हैं ।

तुलसीदास भी कुछ भ्रम निर्मित कर गए ;
ढोंर गवार शूद्र पशु नारी ये सब तारण के अधिकारी । इसकी व्याख्या लोग अलग अलग करते हैं ।

अभी तक जो कहा गया वह इतिहास है

लेकिन वर्तमान में भी हम क्या कर रहे हैं

सबको मालूम है और ज़्यादातर लोग भ्रष्टाचार कर रहे हैं और बड़ी बड़ी संस्थाएं चुप बैठी हैं ।

इस व्यवस्था को जन्म देने के लिये क्या हम सब जिम्मेदार नहीं हैं ?

भय के बिना प्रीति नहीं होती - जब तक ऐसा कानून नहीं होगा जो भ्रष्टाचार को सबसे बड़े अपराध की श्रेणी में रखे , सब ऐसा ही चलता रहेगा ।

बूंद बूंद से घड़ा भरता है , घड़े को भरने से रोकने के लिए बूंद को रोकना  होगा ।

सबको पता है कहाँ से यह शुरू होता है और कहाँ खत्म ।

अब यह देश की जनता पर ही निर्भर करता है की वह अपने बारे में क्या चाहती है ।

स्कूली साक्षरता भले ही नहीं आई हो सरकारी हिसाबों में

इस देश की जनता अब सब समझती है ।

जय हिन्द 

बुधवार, 14 जुलाई 2010

राष्ट्रमंडलीय खेल और राष्ट्र का सम्मान

कॉमन वैल्थ याने जो आम संपत्ति थी एक साम्राज्य की उसका प्रतीक है राष्ट्रमंडलीय खेल. किसकी संपत्ति ब्रिटैन की, जिसपर वह आज तक काबीज है कहीं खुले रूप में कहीं क्षद्म रूप में . हमारे देश में यह मौजूद है क्षद्म र्रोप में क्योंकि आज भी हम उसी कानून व्यवस्था और नौकरशाही के सहारे देश चला रहे हैं जो अंग्रेजों ने अपने लिए बनाई थी .
80,000 करोड़ का खर्च किया जा रहा है इस आयोजन पर . कहीं किसीसे पूछने की जरूरत महसूस हुई जिनने यह पैसा अपनी मेहनत से जमा किया था सरकार के खजाने में ?
ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं है इस देश में की पूछा जाए . मूठी भर लोग , राजनेता और अधिकारी फैसला करते हैं जनता के धन के बंदरबाँट कैसे होगी .
इस देश की 80 प्रतिशत जनता गरीब है . याने लगभग 96 करोड़ . इस पैसे को अगर इन गरीबों में बाँट दिया जाता तो इस देश की गरीबी दूर हो जाती . लेकिन ऐसा चाहता कौन है . समाजवाद के प्रवर्तक आज अपना मुह छुपा रहे होंगे कि उनके नाम पर डाकुओं की फ़ौज खडी है .
जिस देश में हर जगह नेता ही बसे हों वहाँ शुभम   करोति कल्याणं की सोच ही बेमानी लगती है .

एक ठो डंडा पकड़ के नाचे हम
वही जो हमारे पीठ पे पड़ा था कभी

फिर भी है एक आशा क्योंकि आशा में ही जीवन है

गुरुवार, 6 मई 2010

एके 57 का लाइसेंस कहाँ मिलेगा

कुछ लोगों से पूछताछ की भाई ये 47 या 56  रसूखदार असला है इसका लाइसेंस कहाँ मिलेगा ?
जानकार लोगों ने बताया की ये तो मिल ही नहीं सकता .
हमने कहा काय बात करते हो . हर बड़े आदमी के आस पास यह हथियार दिखाई दे जाता है .
उनका कहना था बात तो सही है लेकिन लाइसेंस नहीं मिलेगा
हमने पूछा तो ये सारी सुरक्षा गैर कानूनी है ?
उसने कोई जवाब नहीं दिया .

हर कानूनी और गैर कानूनी अपराधी के पास  यह हथियार है .
लेकिन आपको नहीं मिल सकता . आप तो अपनी सुरक्षा तमंचे से करो या  ...............?

बुधवार, 14 अप्रैल 2010

काँग्रेस ये फैसला कर ले कि वह नक्सलवाद के साथ है?

आज दिग्विजयसिंग जो मध्यप्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में अखिल भारतीय कॉंग्रेस के महासचिव हैं ने एक बयान में चिदम्बरम के नक्सल विरोधी अभियान को गलत बताया है http://naxalwatch.blogspot.com/2010/04/digvijay-questions-chidambarams-naxal.html  .
 इससे तो यही माना जाना चाहिए कि यह कॉंग्रेस पार्टी का मत है, क्योंकि न तो सोनिया गांधी न राहुल गांधी ने कोई भी विचार इस बारे में व्यक्त किया है . न ही इनहोने कोई संवेदना भी दंतेवाड़ा में मारे कर्मियों के बारे में प्रकट की है .
कल ही गृह मंत्रालय ने एक पत्र सभी मंत्रियों और अधिकारियों को जारी कर के कहा था कि इस बारे में केवल गृह मंत्रालय ही आधिकारिक बात कहेगा . दिग्विजयसिंह तो इस सीमा में नहीं आते लेकिन उनकी बात उनके ख़िलाफ़ समाचार पत्र में लगाये आरोप को और पक्का करती है जिसे यहाँ दर्शाया गया है . शायद यह बयान चिदम्बरम के बयान के जवाब में आया है .
काँग्रेस पार्टी को देश की जनता के सामने अपना पक्ष रखना जरूरी है क्योंकि ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि उसके कुछ सहयोगी दल नक्सल समर्थक हैं .इस घटना में मारे गए लोग केंद्रीय सुरक्षा बल के थे इसलिये केंद्र इससे पल्ला भी नहीं झाड़  सकती .

सोमवार, 20 अप्रैल 2009

इसरो और देश को बधाई

हमारे वैज्ञानिको ने फिर एक कमाल कर दिखाया इस बार एक सुरक्षा उपग्रह छोड़ कर। उम्मीद है इससे हमारी धरती पर चोरी छुपे घुसपैठ पर रोक लगेगी। पड़ोसी देशों के हालत देखकर ऐसा और भी जरूरी हो गया था ।