शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

थ्री इडियट - एक सही संदेश

इस फिल्म ने एक पुराने सिद्धांत को सामने रखने की कोशिश की है कि अपने आप को पहचानो . हर इंसान में एक बीज छिपा है उसके विकास का, जो इसे उचित धरातल दे पाया उसका जीवन पुष्पित पल्लवित हो गया . बाकी सब एक भीड़ में गुम गए . रंचो प्रतीक है उस धुन का जिसे अपना वाद्य और संगीत पता था . लगता तो एक स्वप्न जैसा ही है , लेकिन चरितार्थ  करता है " जिन खोजा तीन पाइयाँ गहरे पानी पैठ ".उसके लिए पढ़ाई एक माध्यम था अपने आप तक पहुँचने का, ना कि अपनी झोली भरने का .

सिर्फ खलता है, इसकी प्रस्तुति में कुछ हल्के दृश्य दिखाने क्या जरूरी थे ?

15 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

सही समीक्षा..कुछ हल्के दृष्य अलग किये जा सकते थे.

राज भाटिय़ा ने कहा…

चलिये कल देखेगे फ़िर बतायेगे, क्योकि आज कल तो सभी फ़िल्मे बकवास आती है इस लिये देखनी छोड दी

संगीता पुरी ने कहा…

ये तो सही है कि हर इंसान में एक बीज छिपा है उसके विकास का .. उसे उचित धरातल भी हर कोई देना चाहता है .. क्‍यूंकि वही काम करना उसकी रूचि होती है .. वही उसका लक्ष्‍य होता है .. पर क्‍या समाज के लोग अपनी सोंच से उसे बाधित नहीं करते हें ??

Dileepraaj Nagpal ने कहा…

3 Idiots Acchi Film Hai But All Is Well Kabhi Nahi Ho Sakta...

Shri Krishna ने कहा…

Jiwan is duniya mein aaya hai toh bina gyan ke vo jiwan vyarth hai, parantu aajkal shikshan sansthao ke shikshak hi ye bhul chuke hai sayad, tabhi to ve vidyarthiyo ko is bhid mein ghusa dete hai race lagane ke liye.

Aapki post bilkul sahi hai ki 'hame apne aap ko pahle pahchanna chaiyee..!'

Shrikrishna

Devendra ने कहा…

इस फिल्म ने एक पुराने सिद्धांत को सामने रखने की कोशिश की है कि अपने आप को पहचानो .
.. नई और एकदम सही बात कही आपने.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

छोटी पर उचित समीक्षा है ........ फिल्म सफल है अपना संदेश देने में ..........

डॉ टी एस दराल ने कहा…

अच्छा विश्लेषण किया है, सिन्हा साहब।
मुझे भी फिल्म पसंद आई। हलके द्रश्य आज की युवा पीढ़ी को ध्यान में रखकर दिखाए गए हैं।
इस बदलाव को हम रोक नहीं सकते । हमें ही समझौता करना पड़ेगा।

cmpershad ने कहा…

"सिर्फ खलता है, इसकी प्रस्तुति में कुछ हल्के दृश्य दिखाने क्या जरूरी थे "

फ़िल्मकार को तो सभी तरह के दर्शकों का ध्यान रखना जो पड़ता है :)

Sanjeet Tripathi ने कहा…

bhaiya aapne samay kab nikal liya ye movie dekhne ka ;)

apan to talkies walo k kai bar phone aane k bad bhi nahi dekh payein hain abhi tak

निर्मला कपिला ने कहा…

च्छी लगी समीक्षा देखें कब देख पाते हैं धन्यवाद्

अभिषेक प्रसाद 'अवि' ने कहा…

bilkul sahi kaha aapne.. aaj ke yuva k liye satk film hai ye... nirdeshak ne kuchh halke drishya rakhe hai film ko sahi tarike se aam aadmiyon tak pahuchane ke liye warna gahri baat aksar kahin gahre hi baithi rah jati hai... iska udaharan hai sahrukh khan kee swadesh...

alka sarwat ने कहा…

पहले हम देख लें फिर बताएँगे

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

जब आपने अपना व्‍यस्‍त समय इस फिल्‍म को देखने के लिए निकाल लिया तो हम भी क्‍यूं न निकालें यह सोंचते हुए हम भी इसे देख ही लिये, हमें भी बहुत अच्‍छी लगी यह फिल्‍म; इस फिल्‍म का संदेश युवाओं के लिए पथप्रदर्शक होगा.

बेनामी ने कहा…

three idiots ke bahane shiksha ruchikar ,manoranjak,aur sasti tatha jeevan se judi kaise ho par kiye gaye "eklavya" jaisi sansthao ke prayaso ko vistar dena chahiye.

suresh patel